राज्य
10-Jun-2026


- राज्यपाल ने दी सशर्त मंजूरी - राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नामों पर पहले जताई थी आपत्ति रांची (ईएमएस)। झारखंड राज्य सूचना आयोग में खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को सशर्त मंजूरी दे दी है, जिसके बाद अब वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के पूर्व प्रवक्ता तनुज खत्री, भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और कांग्रेस नेता अमूल नीरज खलखो नए सूचना आयुक्त होंगे। राज्यपाल की हरी झंडी मिलने के बाद अब कार्मिक विभाग जल्द ही इन चारों की नियुक्ति से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा। प्रस्ताव को मंजूरी देने के साथ ही राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए इस पर सशर्त मुहर लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि इन सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में आगे चलकर कोई भी प्रक्रियागत त्रुटि पाई जाती है, या इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के पूर्व के आदेशों व दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर कोई सवाल उठता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राज्य सरकार की होगी। इसके अलावा, राज्यपाल ने आयोग के कामकाज को सुचारु और प्रभावी ढंग से चलाने के लिए राज्य सरकार को मुख्य सूचना आयुक्त के रिक्त पद पर भी जल्द से जल्द नियुक्ति सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले राज्यपाल ने इस प्रस्ताव पर गंभीर रुख अख्तियार किया था। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा के नाम को छोड़कर बाकी अन्य तीनों नामों (तनुज खत्री, शिवपूजन पाठक और अमूल नीरज खलखो) पर कड़ी आपत्ति जताते हुए फाइल को राज्य सरकार को वापस लौटा दिया था। राज्यपाल का मुख्य सवाल इन तीनों की सक्रिय राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर था कि राजनीतिक दलों से सीधे तौर पर जुड़े होने के कारण क्या वे इस संवैधानिक पद के योग्य हैं? इसके साथ ही राजभवन ने इन तीनों नेताओं पर दर्ज आपराधिक मामलों का पूरा ब्योरा भी सरकार से तलब किया था। झारखंड राज्य सूचना आयोग पिछले लगभग छह वर्षों से पूरी तरह से निष्क्रिय पड़ा है, क्योंकि यहां मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों के पद लंबे समय से रिक्त थे। इस कारण आयोग में अपीलों की सुनवाई ठप है और लगभग 25 हजार से अधिक महत्वपूर्ण आवेदन धूल फांक रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे पर झारखंड हाई कोर्ट में भी लगातार सुनवाई चल रही थी, जिससे राज्य सरकार पर जल्द से जल्द नियुक्तियां करने का भारी न्यायिक दबाव बना हुआ था। उम्मीद है कि इन नियुक्तियों के बाद आयोग में लंबित मामलों का निपटारा तेजी से शुरू हो सकेगा। रामयश/ईएमएस 10 जून 2026