-इसे भेद पाना चीनी सेना के लिए होगा नामुमकिन, बौखलाई जिनपिंग सरकार जकार्ता,(ईएमएस)। चीन के ‘मलक्का स्ट्रेट’ के ठीक मुहाने पर एक ऐसा मिलिट्री किला खड़ा हो रहा है, जिसके बाद बीजिंग में बैठी शी जिनपिंग सरकार बौखला गई है। इस अभेद्य मोर्चे को तैयार करने वाले कोई और नहीं, बल्कि इस इलाके के दो सबसे बड़े समुद्री बाहुबली भारत और इंडोनेशिया हैं। भारत-इंडोनेशिया एक चट्टान जैसी ‘एंटी-चाइना फ्रंट लाइन’ खड़ी कर रहे हैं, जिसे भेद पाना चीनी सेना के लिए नामुमकिन होगा। इस पूरे खेल के केंद्र में इंडोनेशिया का ‘नातुना द्वीप समूह’ है, जिसे हथियाने के लिए चीन दिन-रात नजरें गड़ाए बैठा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक समुंद्र के रास्तों को देखें तो इंडोनेशिया दुनिया के सबसे अहम और लाइफलाइन माने जाने वाले समुद्री रास्तों के बीच में बसा हुआ है। चीन का करीब सारा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उसकी फैक्ट्रियों को चलाने वाला खाड़ी देशों का तेल इसी मलक्का स्ट्रेट से गुजरता है1 ऐसे में इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे एक ऐसा रणनीतिक ट्विस्ट देती है, जो चीन के विस्तारवाद और दादागिरी को रोकने की ताकत रखता है। यही वजह है कि भारत अब जकार्ता के साथ खुद को एक ‘बिग ब्रदर’ और सबसे भरोसेमंद मददगार के रूप में स्थापित कर रहा है। भारत ने अब साफ कर दिया है कि बीजिंग का कम्युनिस्ट प्रशासन अब इंडो-पैसिफिक यानी हिंद-प्रशांत इलाके को अपनी बपौती या जागीर समझने की भूल न करे। भारत और इंडोनेशिया के बीच इस मजबूत तालमेल की वजह चीन की तरफ से इंडोनेशिया को मिलने वाली धमकियां और उकसाने वाली हरकतें हैं। चीन अपनी अवैध और खुद के नक्शे पर खींची गई मनगढ़ंत ‘नाइन-डैश लाइन’ के जरिए इंडोनेशिया के संप्रभु समुद्री क्षेत्र में लगातार घुसपैठ करने की चालें चलता है। खासकर इंडोनेशिया के गैस और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर ‘नातुना आइलैंड’ के आसपास चीन की काली करतूतें बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। चीनी कोस्ट गार्ड के बड़े-बड़े युद्धपोत और भारी हथियारों से लैस उनके ‘फिशिंग मलीशिया’ यानी मछुआरों के भेष में चीनी लड़ाके आए दिन इंडोनेशिया की समुद्री सीमा में घुस आते हैं और जकार्ता की संप्रभुता को खुली चुनौती देते हैं। इंडोनेशिया अच्छी तरह जानता है कि वो अकेले दम पर चीन जैसे ताकतवर देश का मुकाबला नहीं कर सकता और ठीक इसी मोड़ पर एंट्री होती है भारत की। अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी कर चुके हैं। दोनों देशों की नौसेनाएं न केवल मैरीटाइम पेट्रोल यानी समुद्री गश्त का बेहतरीन तालमेल बिठा रही हैं, बल्कि रियल-टाइम इंटेलिजेंस यानी चीनी सेना की हरकतों की खुफिया जानकारी भी लाइव एक-दूसरे के साथ साझा कर रही हैं। अगर चीन ने कोई भी हिमाकत की तो उसे तुरंत और ऑन-द-स्पॉट जवाब देने के लिए दोनों देशों ने मिलकर एक जॉइंट नेवल रिस्पॉन्स प्लान तैयार किया है। इस एंटी-चाइना गठबंधन को और घातक बनाने के लिए भारत अब इंडोनेशिया को भारी मिलिट्री पावर और मॉडर्न डिफेंस टेक्नोलॉजी का डबल डोज देने जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत खुद को इंडोनेशिया की सबसे मजबूत सुरक्षा ढाल के रूप में पेश कर रहा है। सूत्रों की मानें तो दोनों देशों के बीच भारत की सबसे खतरनाक और दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक ‘ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल’ की सप्लाई को लेकर बातचीत चल रही है। इंडोनेशिया के रणनीतिकार भी जानते हैं कि वो चीन को टक्कर देने के लिए रातों-रात कोई बहुत बड़ी नेवी खड़ी नहीं कर सकते, लेकिन अगर उनके पास भारत की ब्रह्मोस जैसी मारक मिसाइलें आ गईं तो वे नातुना आइलैंड पर बैठकर ही चीनी युद्धपोतों, चीनी मुख्य भूमि और उनके बड़े आर्थिक केंद्रों को निशाना बना सकते हैं। ये एक ऐसा गेम-चेंजर हथियार साबित होगा, जिसे देखने के बाद चीन इंडोनेशिया के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले सौ बार सोचेगा। बता दें नातुना आइलैंड के आस-पास का जो समुद्री इलाका है, वो प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का बहुत बड़ा गढ़ है। यहां ‘ईस्ट नातुना’ नाम का एक विशाल गैस ब्लॉक है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अनछुए गैस भंडारों में से एक माना जाता है। चीन की नजर इस इलाके के प्राकृतिक संसाधनों को लूटने पर टिकी है। ये पूरा इलाका समुद्री जीवों और मछलियों से खचाखच भरा है। चूंकि चीन दुनिया में सी-फूड का सबसे बड़ा कंज्यूमर है और उसके अपने समुद्री इलाकों में ज्यादा मछलियां बची नहीं हैं, इसलिए वो नातुना के पास अपने हथियारबंद लड़ाकों को भेजकर इंडोनेशिया के हक की मछलियां चोरी करवाता है। चीन को हमेशा ये डर सताता रहता है कि अगर भारत, अमेरिका या इंडोनेशिया मिलकर उसकी इस लाइफलाइन को ब्लॉक कर सकते हैं, इसे कूटनीति में चीन का ‘मलक्का डिलेमा’ कहते हैं। अगर चीन नातुना पर काबिज हो जाता है तो वो वहां अपने रडार और मिसाइलें तैनात करके इस पूरे रास्ते की जासूसी कर सकता है और अपने दुश्मनों को दूर रख सकता है। अब जबकि भारत के पीएम मोदी फिर इंडोनेशिया के दौरे पर जाने की तैयारी में हैं तो कूटनीति की टेबल पर कई और बड़े सैन्य समझौतों पर मुहर लग सकती है, जो आने वाले दिनों में एशिया की पूरी जियोपॉलिटिक्स को हमेशा के लिए बदलकर रख देगी। सिराज/ईएमएस 10जून26