अंतर्राष्ट्रीय
10-Jun-2026


क्वेटा,(ईएमएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा की गई सख्त कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता जाहिर की है। इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करने और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति के गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है। रावलाकोट शहर में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में कई लोगों की मौत हो गई है, जबकि सैकड़ों घायल हुए हैं। तनाव तब और बढ़ गया जब पाकिस्तान प्रशासन ने 9 जून को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित किया। इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने फैसले की कड़ी निंदा कर कहा कि किसी नागरिक संगठन को बिना ठोस आधार के आतंकवादी घोषित करना और पूरे क्षेत्र को बाहरी दुनिया से काटना, लोगों के संगठन बनाने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आईएचआरएफ ने दावा किया है कि 8 और 9 जून के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक महिला सहित 25 से अधिक लोग मारे गए। वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तानी प्रशासन से संयम बरतने, हालात शांत करने और बल प्रयोग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करने की अपील की है। एमनेस्टी ने कहा कि बल का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के रूप में और आवश्यकता व अनुपात के सिद्धांतों के तहत ही होना चाहिए। एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया की उप-क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने जेएएसी पर रोक लगाने और संचार व्यवस्था बंद करने को मानवाधिकारों के प्रति गंभीर लापरवाही बताया। संगठन ने हबीब के मामले को उजागर किया, जिन्हें 5 जून को पुलिस मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उनके शव को रावलाकोट के संयुक्त सैन्य अस्पताल लाए जाने के बाद हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें पुलिस के अनुसार आठ प्रदर्शनकारी और चार पुलिसकर्मी मारे गए। इसाबेल लासी ने प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों की मौत की बढ़ती हिंसा और शाहजेब हबीब की न्यायेत्तर हत्या के मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुसार जवाबदेह ठहराया जा सके। आशीष दुबे / 10 जून 2026