राज्य
10-Jun-2026
...


मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई में फेरीवाला (हॉकर) लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कथित घोटाले का मामला सामने आया है। बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आरोप लगाया गया कि महानगरपालिका प्रशासन की मिलीभगत से आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी फेरीवाला लाइसेंस हासिल कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने गोरेगांव पुलिस स्टेशन को जांच कर 14 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। गोरेगांव पश्चिम के निवासी एवं अधिवक्ता आशीष दुबे ने हाईकोर्ट को दस्तावेजों के साथ जानकारी दी कि गोरेगांव रेलवे स्टेशन क्षेत्र में एक परिवार के स्वामित्व में पांच दुकानें हैं। इसके बावजूद उसी परिवार के नाम पर तीन वैध फेरीवाला लाइसेंस भी जारी किए गए हैं। दुबे का आरोप है कि यह परिवार मुंबई के एक बंगले में रहता है और पर्याप्त संपत्ति का मालिक होने के बावजूद खुद को गरीब बताकर महापालिका से फेरीवाला लाइसेंस हासिल करने में सफल रहा। उनके अनुसार, यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह फेरीवाला लाइसेंस वितरण प्रणाली में गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितता का संकेत है। - हाईकोर्ट ने पुलिस जांच के दिए आदेश न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खता की खंडपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए आशीष दुबे को उसी दिन गोरेगांव पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया। साथ ही संबंधित क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को आदेश दिया गया कि शिकायत की जांच कर 14 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी की जाए और उसकी रिपोर्ट अगली सुनवाई, 30 जून, को अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। - मुंबई में लगभग एक लाख लाइसेंसधारी फेरीवाले सुनवाई के दौरान महानगरपालिका की ओर से अधिवक्ता चैतन्य चव्हाण ने अदालत को बताया कि मुंबई में 99,435 अधिकृत फेरीवाले हैं। उनकी पहचान सत्यापित कर लाइसेंस और क्यूआर कोड आधारित पहचान प्रणाली लागू की जा रही है। महानगरपालिका के अनुसार अब तक लगभग 20,000 फेरीवालों के क्यूआर कोड तैयार किए जा चुके हैं और उनका वितरण जारी है। हालांकि कई फेरीवाले अपने मूल गांव चले गए हैं, जिसके कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। - महानगरपालिका को हाईकोर्ट की फटकार अदालत द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी (कोर्ट मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता जमशेद मिस्त्री ने कहा कि महानगरपालिका ने इस प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त जनजागरूकता अभियान नहीं चलाया है। इस पर हाईकोर्ट ने महानगरपालिका के धीमे और लापरवाह रवैये पर नाराजगी जताई। न्यायमूर्ति कमल खाता ने सवाल किया कि क्या हर काम के लिए अदालत को बार-बार आदेश जारी करने पड़ेंगे। न्यायमूर्ति अजय गडकरी ने भी महानगरपालिका को फटकार लगाते हुए कहा कि चुनाव, कर्मचारियों की कमी या अन्य प्रशासनिक कारणों का बहाना बनाकर जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने निर्देश दिया कि अगले एक सप्ताह के भीतर मुंबई के प्रमुख मराठी, हिंदी, गुजराती और अंग्रेजी समाचार पत्रों में इस संबंध में सूचना प्रकाशित कर व्यापक जनजागरूकता की जाए। - विरार से चर्चगेट तक फेरीवालों का कब्जा सुनवाई के दौरान अदालत ने मुंबई में रेलवे स्टेशनों और आवासीय क्षेत्रों के बाहर बढ़ते फेरीवालों के अतिक्रमण पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि विरार से चर्चगेट तक कई स्थानों पर फेरीवालों ने सार्वजनिक स्थानों और फुटपाथों पर कब्जा कर रखा है, जिससे आम नागरिकों को भारी परेशानी हो रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई के बाद उन्हें दोबारा उसी स्थान पर बैठने से रोकना पुलिस की जिम्मेदारी है। - पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से पूछा कि यदि पुलिस नियमित गश्त करती है तो फिर कई जगहों पर पुलिस थानों के सामने तक अवैध फेरीवाले कैसे बैठे दिखाई देते हैं। अदालत ने कहा कि यदि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद अवैध फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई प्रभावी नहीं हो रही है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है। - क्या है मामला? यह मामला गोरेगांव मर्चेंट्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि गोरेगांव पश्चिम रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में अवैध फेरीवालों ने सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा कर लिया है, जिससे पैदल चलने वालों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस और महानगरपालिका को बार-बार शिकायतें देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप यह भी है कि कार्रवाई के लिए महानगरपालिका की टीम पहुंचने से पहले ही फेरीवालों को सूचना मिल जाती है, जिससे वे मौके से हट जाते हैं। कुछ मामलों में स्थानीय लोगों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं। - अगली सुनवाई 30 जून को हाईकोर्ट ने पुलिस को जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी, जहां अदालत जांच की प्रगति और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी। संजय/संतोष झा- १० जून/२०२६/ईएमएस