राज्य
10-Jun-2026


अररिया, (ईएमएस)। ‎बिहार के अररिया जिले से करोड़ों रुपये के मोबाइल हैंडसेट और एक्सेसरीज की रहस्यमयी गुमशुदगी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्रेटर नोएडा से असम के गुवाहाटी के लिए रवाना हुआ एक कंटेनर ट्रक अररिया में लावारिस हालत में बरामद हुआ, जिसमें से सैकड़ों मोबाइल बॉक्स गायब पाए गए। मामले को लेकर पुलिस ने जांच तेज कर दी है, जबकि चालक और खलासी अब तक लापता हैं। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले के बेगीकोल निवासी राणा रामंजय सिंह ने नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि कंटेनर में रियलमी, ओप्पो और वनप्लस जैसी प्रमुख कंपनियों के स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान लोड थे। यह कंटेनर 6 जून को ग्रेटर नोएडा स्थित वेयरहाउस से गुवाहाटी के कामाख्या क्षेत्र के लिए रवाना हुआ था। शुरुआत में कंपनी का चालक से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 7 जून के बाद चालक का मोबाइल बंद हो गया और उससे संपर्क टूट गया। चालक से संपर्क नहीं होने पर कंपनी प्रबंधन ने कंटेनर की लोकेशन ट्रैक करने के लिए फास्टैग डेटा की जांच की। जांच में पता चला कि 7 जून की शाम करीब 7 बजे वाहन की आखिरी टोल एंट्री अररिया जिले के हरियाबाड़ा टोल प्लाजा पर दर्ज हुई थी। इसके बाद वाहन की गतिविधियों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। 8 जून को कंटेनर अररिया के जीरो माइल स्थित एक पेट्रोल पंप के पास लावारिस हालत में खड़ा मिला। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कंटेनर को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। जब कंटेनर खोला गया तो पता चला कि उसमें लोड किए गए कुल 1143 बॉक्स में से केवल 531 बॉक्स ही मौजूद थे, जबकि 612 बॉक्स गायब थे। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, गायब हुए मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमत करोड़ों रुपये में हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अररिया के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। एसपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि कंटेनर के विभिन्न टोल प्लाजा से गुजरने के समय का विश्लेषण किया जा रहा है। शुरुआती जांच में अयोध्या और गोरखपुर के बीच वाहन की आवाजाही में असामान्य देरी सामने आई है, जिसे जांच का अहम बिंदु माना जा रहा है। चूंकि मामला उत्तर प्रदेश, बिहार और असम से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे अंतरराज्यीय अपराध मानकर जांच की जा रही है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, फास्टैग रिकॉर्ड, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हुई है। संतोष झा- १० जून/२०२६/ईएमएस