न्यूयॉर्क (ईएमएस)। आज के दौर में रिश्तों के टूटने का एक बड़ा कारण है, लोग एक-दूसरे को स्वीकार करने के बजाय बदलने की कोशिश करते हैं। पति-पत्नी हों, मित्र हों या परिवार के सदस्य हों. अक्सर अपेक्षा की जाती है कि दूसरा व्यक्ति हमारी सोच, आदतों और पसंद के अनुसार व्यवहार करे। जब ऐसा नहीं होता तो मतभेद, तनाव और दूरियां बढ़ने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है, हर व्यक्ति का अपना स्वभाव, सोच और जीवन जीने का तरीका होता है। किसी को पूरी तरह बदलना न तो संभव है, नाही उचित है। रिश्तों की खूबसूरती इसी में है, दो अलग-अलग व्यक्तित्व एवं दो अलग विचार एक-दूसरे की विशेषताओं को स्वीकार करते हुए साथ मे आगे बढ़ें। जब हम दूसरे की कमियों पर ध्यान देने के स्थान पर उसकी अच्छाइयों को महत्व देते हैं. ऐसी स्थिति में संबंध अधिक मजबूत और सुखद बनते हैं। सफल रिश्तों का मूल मंत्र समझौता नहीं, बल्कि सामंजस्य है। इसका अर्थ है, कुछ बातें अपने मन की हों, कुछ दूसरे के मन की हों। यदि हर निर्णय केवल एक व्यक्ति की इच्छा के अनुसार होगा, तो दूसरे के मन में उपेक्षा और असंतोष की भावना पैदा होगी। जब दोनों पक्ष एक-दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान करते हैं. तो दोनों के बीच विश्वास और अपनापन बढ़ता है। रिश्ते किसी प्रतियोगिता का मैदान नहीं हैं. जहां किसी एक की जीत और दूसरे की हार हो। यह एक साझा यात्रा हैं. जिसमें दोनों को साथ चलना होता है। इसलिए दूसरे को बदलने की जिद छोड़कर उसे आत्मसात करना सीखें। यही दृष्टिकोण रिश्तों में मिठास, स्थिरता और आनंद बनाए रखता है. जीवन को अधिक सुखद और संतुलित बनाता है। अमेरिका में रिश्तों को लेकर कई विश्वविद्यालय द्वारा शोध किये जा रहे हैं. रिलेशनशिप विशेषज्ञों ने भी जिस तरह की राय दी है.उसके अनुसार एक दूसरे के विचारों का सम्मान करने से रिश्ते प्रगाढ़ होते हैं एसजे/ 14 जून /2026