अंतर्राष्ट्रीय
14-Jun-2026


-साउथ कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को अदालत ने सुनाई 30 साल की सजा -संविधान की उपेक्षा, मनमाने निर्णय और तानाशाही की प्रवृत्ति सियोल,(ईएमएस)। दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को सत्ता के दुरुपयोग और संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने से जुड़े मामलों में एक और बड़ा झटका लगा है। हाल ही में उन्हें उत्तर कोरिया से जुड़े एक कथित षड्यंत्र मामले में अतिरिक्त 30 वर्ष की सजा सुनाई गई है। इससे पहले भी उन्हें मार्शल लॉ लागू करने और संवैधानिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। ऐसे में पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल का यह मामला दुनिया में लोकतांत्रिक व्यवस्था एवं संस्थाओं की शक्ति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया में राजनीतिक संकट की शुरुआत 3 दिसंबर 2024 को हुई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक-योल ने विपक्षी दलों पर शासन में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए अचानक मार्शल लॉ लागू करने की घोषणा कर दी। इसके बाद संसद परिसर में सेना और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। आरोप लगा कि इस कदम का उद्देश्य सांसदों को संसद पहुंचने और मतदान करने से रोकना था। उसके बाद साउथ कोरिया में गंभीर राजनीतिक संकट पैदा हो गया। संसद, न्यायपालिका और जनता के विरोध से उनकी सत्ता समाप्त हो गई। उन्हें कई मामलों में अदालत से दोषी ठहराया गया है। इन दिनों वह जेल में है। जेल से बाहर आने की संभावना भी लगभग खत्म हो गई है। संवैधानिक उल्लंघन के साथ ये आरोप हुए सिद्ध अदालतों और अभियोजकों के अनुसार यून सुक-योल पर निम्न आरोप सिद्ध हुए हैँ। -संसद की शक्तियों को सीमित करने का प्रयास किया। -मार्शल लॉ लागू करने से पहले आवश्यक कैबिनेट से मंजूरी लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया। -सैन्य और पुलिस बल का व्यक्तिगत एवं राजनीतिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किया। -सांसदों और राजनीतिक नेताओं को अवैधानिक रूप से गिरफ्तार करने की योजना। -गिरफ्तारी वारंट के क्रियान्वयन में बाधा डालने का प्रयास किया। -आधिकारिक दस्तावेजों में हेर-फेर और रिकॉर्ड नष्ट किया, आदि आरोपों पर मुकदमा चला। सांसदों और जनता ने मिलकर रोकी तानाशाही? मार्शल लॉ की घोषणा के कुछ घंटों के भीतर ही विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के कई सांसद सुरक्षा घेरा तोड़कर संसद में पहुंच गए थे। सांसदों ने संसद मे सर्वसम्मति से मार्शल लॉ समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया। देश के कई स्थानों पर हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर लोकतंत्र बचाने के समर्थन में प्रदर्शन किए। जनता ने संसद भवन को घेर लिया। व्यापक जन-दबाव के बीच संसद ने राष्ट्रपति के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। न्यायपालिका की भूमिका दिसंबर 2024 में संसद द्वारा महाभियोग पारित होने के बाद दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने अप्रैल 2025 में 8-0 के सर्वसम्मत निर्णय से यून को पद से हटाने का आदेश दिया। इसके बाद उनके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे अदालत में शुरू हुए। सजा और कानूनी कार्रवाई जनवरी 2026 में मार्शल लॉ से जुड़े मामलों में उन्हें 5 वर्ष की सजा सुनाई गई है। फरवरी 2026 में विद्रोह (इन्शुररेक्शन) और संवैधानिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के आरोप में उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई है। जून माह में उत्तर कोरिया के ऊपर ड्रोन भेजकर तनाव बढ़ाने और सत्ता मजबूत करने की कथित साजिश से जुड़े मामले में उन्हें अतिरिक्त 30 वर्ष की सजा सुनाई गई है। लोकतंत्र के लिए सीधा संदेश दक्षिण कोरिया एक लोकतांत्रिक देश है। दक्षिण कोरिया की यह घटना दर्शाती है, कि मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाएं, सक्रिय सांसद, संसद की आसंदी की निष्पक्षता, स्वतंत्र न्यायपालिका और देश के जागरूक नागरिक किसी भी निर्वाचित नेता अथवा निर्वाचित सरकार की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगा सकते हैं। राष्ट्रपति जैसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति को लोकतांत्रिक व्यवस्था में संविधान से ऊपर नहीं माना गया है। संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें पदच्युत कर दंडित करने का प्रावधान है। साउथ कोरिया की इस घटना ने इसे स्पष्ट शब्दों में बतला दिया है। एसजे / 14 जून 26