क्षेत्रीय
14-Jun-2026
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- विधान में इंद्र ने चढ़ाए निर्वाण लडडू, जिनेंद्र भगवान का किया अभिषेक, चढ़ाए महाअर्घ्य ग्वालियर (ईएमएस)| सिद्धों की आराधना के बिना मुक्ति का मार्ग नहीं मिलता है जब तक व्यक्ति का शरीर पवित्र नहीं होता तब तक विशु‌द्धी नहीं बड़ सकती है। शरीर में कोई रोग नहीं होना चाहिए। शरीर स्वस्थ होना चाहिए। कोई जख्म घाव नहीं होना चाहिए। द्रव्य शुद्ध नहीं तो भाव शुद्ध नहीं और भाव शुद्ध नहीं होते तो परिणाम शुद्ध नहीं होते हैं। परिणाम शुद्धि के बिना आत्मा शुद्ध नहीं होती और आत्मा शुद्धि के बिना सिद्धि की प्राप्ति नहीं होती है। पवित्र सिद्धि की साधना के बिना आत्मा का कल्याण नहीं होता है। यह विचार मुनिश्री विधुव सागर महाराज ने आज रविवार को दीनदयाल नगर स्थित दिंगबर महावीर जैन मंदिर में चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में धर्मसभा को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भक्ति का फल सांसारिक विषयों में ना लगाएं नही उनकी अपेक्षा रखें क्योंकि यह विधान तो वह विधान है जिसके माध्यम से अनंत कालीन सुख की प्राप्ति हो सकती है इससे अनन्त फलों की प्राति की मांग करना यह उचित नहीं होगा। वही मुनिश्री के चरणों का पाद प्रचलन गोरमी समाज ओर शास्त्र भेट भक्तामर महिला मंडल डीडी नगर ने दिया। वही अतिथियों का सम्मान मुख्य संयोजक बाबूलाल जैन, डॉ योगेश जैन, विपुल जैन, पवन जैन, रजनीश जैन आदि ने किया। - विधान में इंद्र ने चढ़ाए निर्वाण लडडू, जिनेंद्र भगवान का किया अभिषेक, चढ़ाए महाअर्घ्य जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विधानाचार्य पंडित राजेंद्र जैन में मंत्र उच्चारण के साथ सौ धर्म इंद्र महेंद्र जैन सहित इंद्रगणों ने संगीतमय धुन पर भगवान जिनेंद्र का कलशों में जल भरकर जयकारों के साथ अभिषेक किया। वही शांतिधारा का प्रथम सौभाग्य प्रभादेवी रमन जैन परिवार को प्राप्त हुआ। इंद्र इंद्राणियों ने भगवान की दीपकों से मंगल आरती उतारी। वही भगवान शांतिनाथ के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लडडू रूपेश सिंघई ने भक्ति भाव के साथ चढ़ाया। - इंद्र इन्द्राणी ने किया नृत्य, चढ़ाए महा अर्घ्य समर्पित किए। भोपाल से आए संगीतकार रामकुमार भाई के मधुर भजनों के साथ इंद्र इंद्राणियों ने भजनों विभीर होकर नृत्य किया। विधान विधानाचार्य राजेंद्र जैन और विधानाचार्य मुन्नालाल जैन के द्वारा विधि विधान से श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन कराई गई। विधान में सौधर्म इंद्र महेंद्र सीमा जैन, प्रवीण कुसुम जैन, यज्ञ नायक रजनीश सीमा जैन, मैना सुंदरी श्रीपाल वरुण शिवांगी जैन सहित इंद्र इन्द्राणी ने पूजन अर्चना कर मंडप पर महाअर्ध्य समर्पित किए गए।