मंडला (ईएमएस)। नारायणगंज स्वास्थ्य केंद्र में फॉर्म भरकर ली जीते-जी नेत्रदान की प्रतिज्ञा, नेत्र चिकित्सा सहायक की प्रेरणा से लिया बड़ा फैसला नेत्रदान-महादान के संकल्प को चरितार्थ करते हुए नारायणगंज क्षेत्र में मानवता की एक अनूठी और प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। विकासखंड नारायणगंज के ग्राम करहैया नगरार निवासी संजय तिवारी ने समाज कल्याण और सेवा भावना की दिशा में एक अनुकरणीय कदम उठाया है। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणगंज पहुंचकर अपनी स्वेच्छा से नेत्रदान करने की घोषणा की है। इस संबंध में उन्होंने बकायदा सभी आवश्यक कानूनी और चिकित्सीय औपचारिकताओं को पूरा करते हुए सहमति का घोषणा पत्र भरा है। जानकारी अनुसार संजय कुमार तिवारी पिछले कुछ समय से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणगंज में पदस्थ नेत्र चिकित्सा सहायक जयकरण चौधरी के संपर्क में थे। श्री चौधरी द्वारा लगातार क्षेत्र में नेत्र सुरक्षा और नेत्रदान को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता प्रयासों से प्रभावित होकर संजय तिवारी ने यह ऐतिहासिक निर्णय लिया। संजय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और वहाँ सीबीएमओ डॉ. अमृतलाल कोल के सम्मुख उपस्थित होकर पूर्ण सहमति के साथ नेत्रदान का आधिकारिक घोषणा पत्र भरा। घोषणा पत्र सौंपने के बाद संजय तिवारी ने अत्यंत भावुक होकर कहा मानव जीवन क्षणभंगुर है, लेकिन हमारे जाने के बाद भी यदि हमारा कोई अंग किसी के काम आ सके, तो यह हमारे जीवन की सार्थकता है। मेरे मरणोपरांत मेरी आंखें समाज के किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के काम आ सकें और उसका जीवन रोशन हो सके, इससे बढ़कर मेरे लिए और कोई खुशी या पुण्य नहीं हो सकता। जीते-जी संकल्प, मरणोपरांत दान इस अवसर पर उपस्थित चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों ने नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि नेत्रदान एक ऐसा अनूठा दान है, जिसकी घोषणा या संकल्प तो व्यक्ति अपने जीवित रहते हुए लेता है, लेकिन इसका वास्तविक दान और उपयोग व्यक्ति की मृत्यु के बाद ही संभव हो पाता है। सीएचसी में पदस्थ चिकित्सकों ने इसके तकनीकी और समयबद्ध महत्व को समझाते हुए बताया कि किसी भी संकल्पित व्यक्ति की मृत्यु होने के ठीक 6 घंटे के भीतर ही मृत शरीर से कॉर्निया (आंख की पुतली) को सुरक्षित निकालना बेहद जरूरी होता है। यदि इस समय सीमा में देरी हो जाए, तो कॉर्निया प्रत्यारोपण के योग्य नहीं रह जाता। एक नेत्रदान, तीन जीवन में ला सकता है उजाला नेत्र चिकित्सा सहायक जयकरण चौधरी ने बताया कि चिकित्सा विज्ञान के आधुनिक दौर में अब एक व्यक्ति द्वारा किए गए नेत्रदान मतलब दोनों कॉर्निया से लगभग 3 दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन को रोशन किया जा सकता है। कॉर्निया की परतों के आधार पर अलग-अलग मरीजों में इसका सफल प्रत्यारोपण किया जाता है। स्वास्थ्य केंद्र ने की सराहना, क्षेत्र के लिए बने प्रेरणास्रोत संजय तिवारी के इस मानवीय कदम की सीबीएमओ डॉ. अमृतलाल कोल और नेत्र चिकित्सा सहायक जयकरण चौधरी सहित पूरे अस्पताल स्टाफ ने सराहना की है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण अंचलों में आज भी अंगदान और नेत्रदान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। ऐसे समय में संजय तिवारी जैसे जागरूक नागरिक का आगे आकर स्वेच्छा से घोषणा पत्र भरना पूरे नारायणगंज क्षेत्र के लिए एक मिसाल है। स्वास्थ्य विभाग ने उम्मीद जताई है कि इस कदम से प्रेरणा लेकर क्षेत्र के अन्य युवा और ग्रामीण भी नेत्रदान के इस महाभियान से जुड़ेंगे, जिससे समाज से अंधापन पूरी तरह खत्म किया जा सके। ईएमएस/मोहने/ 14 जून 2026