क्षेत्रीय
15-Jun-2026
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ग्वालियर ( ईएमएस ) | दीनदयाल नगर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में परम पूज्य मुनिश्री विधुव सागर महाराज सानिध्य में चल रहें श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आज पांचवें दिन भगवान नेमी कुमार और राजुल के विवाह की शानदार प्रस्तुति दी गई। इस नाटक के दौरान राजकुमार नेमी की बारात समाजजनों द्वारा हर्षोल्लास से निकाली गई। तत्पश्चात उनके वैराग्य का चित्रण दिखाया गया। जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन बताया कि विधानाचार्य राजेंद्र जैन ओर संगीतकार रामकुमार ने नेमी कुमार ओर राजुल की नाटक मंचन करवाया। जिसमे नाटिका ने श्रीकृष्ण के चचेरे भाई एवं जैन आगम के 22 वें तीर्थंकर भगवान नेमीनाथ बारात ठाठ-बांट के साथ शौरीपुर से जुनागढ़ की ओर जा रही थी। जैसे ही नेमि कुमार भगवान दूल्हा बनकर रथ पर सवार होकर राजुल राजमती को ब्याहने के लिए निकले। तभी विवाह समारोह में वध के लिए लाए पशुओं को पीड़ा देखकर नेमी कुमार को वैराग्य उमड़ आता है और वह गिरनार पर्वत पर जाकर तपस्या करने लगते हैं। बाद में राजुल भी नेमी कुमार के लिए विलाप करती हैं और बाद में खुद भी आर्यिका दीक्षा लेकर तपस्या करती हैं। नेमी वरुण ओर राजुल शिवांगी जैन बनी। - विधान में रिद्धि सिद्धि मंत्रों से किया जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, मस्तक पर बृहद शांतिधारा जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि विधानाचार्य पंडित राजेंद्र जैन में मंत्र उच्चारण के साथ सौ धर्म इंद्र महेंद्र जैन सहित इंद्रगणों ने संगीतमय धुन पर भगवान जिनेंद्र का कलशों में जयकारों के साथ भगवान जिनेंद्र का अभिषेक किया। वही शांतिधारा का प्रथम सौभाग्य बाबूलाल जैन परिवार को प्राप्त हुआ। वही इंद्र इंद्राणियों ने भगवान की दीपकों से मंगल आरती उतारी। -इंद्र इन्द्राणी ने किया नृत्य, चढ़ाए महा अर्घ्य समर्पित किए। विधान विधानाचार्य राजेंद्र जैन और विधानाचार्य मुन्नालाल जैन के द्वारा विधि विधान से श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की पूजन कराई गई। विधान में सौधर्म इंद्र महेंद्र सीमा जैन, प्रवीण कुसुम जैन, यज्ञ नायक रजनीश सीमा जैन, मैना सुंदरी श्रीपाल वरुण शिवांगी जैन सहित इंद्र इन्द्राणी ने पूजन अर्चना कर मंडप पर महाअर्ध्य समर्पित किए गए। *धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है, इसको समझो और जीवन में उतारो - मुनिश्री* मुनिश्री विधुव सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म ही जीवन में श्रेष्ठ है, इसको समझो और जीवन में उतारो। यह नर जन्म मिला है इसको सार्थक करने में ही कल्याण है। गुरु संगति में स्वयं भगवान बनने की शक्ति मिलती है।जीवन में अच्छा सोचोगे और बुराइयों से दूर रहोगे तो आत्मिक शांति मिलेगी। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन ममता आशीष जैन ने ओर शास्त्र भेट शैली राकेश जैन परिवार ने किया। वही मुख्य संयोजक बाबूलाल जैन, डॉ योगेश जैन, विपुल जैन, पवन जैन, रजनीश जैन ने अतिथियों का सम्मान किया।