क्षेत्रीय
15-Jun-2026
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- प्रेसवार्ता में जानकारी देते कांग्रेस नेता। शाजापुर (ईएमएस)। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब चुनावी मैदान से राजनीति साजिश के तहत विपक्ष की मजबूत आवाज को बाहर कर दिया जाए, तो चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद अब यह मुद्दा एक बड़ी राजनीतिक और कानूनी बहस का रूप ले चुका है। इसी घटनाक्रम के विरोध में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर सोमवार को शाजापुर में नरेश्वर प्रतापसिंह, रामवीर सिकरवार सहित अन्य कांग्रेसी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी ने इस पूरी कार्रवाई को न केवल एक उम्मीदवार के साथ अन्याय बताया, बल्कि इसे लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय और संवैधानिक मूल्यों पर एक बेहद गंभीर प्रहार करार दिया है। नामांकन रद्द किए जाने की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कई अहम विसंगतियों को उजागर किया। प्रेस वार्ता में बताया गया कि जिस निजी परिवाद को आधार बनाकर यह कार्रवाई की गई है, उसमें मीनाक्षी नटराजन अभियुक्त की श्रेणी में नहीं आतीं, बल्कि वे केवल एक प्रतिवादी के रूप में दर्ज हैं। कानूनी नजरिए से इन दोनों स्थितियों में बड़ा अंतर होता है, लेकिन इन्हें एक समान मानकर जो व्याख्या की गई है, वह चुनाव प्रणाली पर बड़ा कानूनी प्रश्नचिह्न लगाती है। इसके अलावा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए और फॉर्म-26 का मूल उद्देश्य उन उम्मीदवारों की जानकारी जुटाना होता है जिन पर विधिवत आपराधिक मामले चल रहे हों। कांग्रेस का तर्क है कि जिस आधार पर यह नामांकन खारिज किया गया है, वह इन कानूनी प्रावधानों की मूल भावना और व्याख्या से कोसों दूर है। प्रेस वार्ता के दौरान नरेश्वर प्रताप सिंह, रामवीर सिकरवार और उपस्थित अन्य नेताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि यदि भविष्य में ऐसे आधारों पर नामांकन निरस्त किए जाने लगे जिनकी नामांकन प्रपत्र में कोई स्पष्ट अपेक्षा ही नहीं होती, तो किसी भी चुनाव में उम्मीदवारों के सामने अनिश्चितता और मनमानी की स्थिति पैदा हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. विवेक तन्खा व अभिषेक मनु सिंघवी सहित शीर्ष नेतृत्व ने देश के सामने यह बड़ा सवाल रखा है कि क्या अब चुनावी प्रक्रिया कानून के दायरे में चलेगी या फिर राजनीतिक दबाव इसका संचालन करेगा? पार्टी का मानना है कि यदि विवादित और तकनीकी आधारों का सहारा लेकर विपक्षी उम्मीदवारों को बाहर का रास्ता दिखाया जाने लगा, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि संविधान की रक्षा के लिए उनका यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा, क्योंकि लोकतंत्र केवल चुनाव होने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव होने से ही जीवित रहता है। ईएमएस/राजेश कलजोरिया/ 15 जून 2026