- तमिलनाडु सरकार बोली- चारों ने स्वेच्छा से छोड़ी सदस्यता - नियमों के तहत होगी कार्रवाई चेन्नई (ईएमएस)। तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट को सूचित किया है कि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के चार विधायकों ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपनी मर्जी से विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सदन के तय नियमों के मुताबिक ही आगे की कानूनी कार्रवाई करेंगे। यह दलील कोर्ट में उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई, जिसमें स्पीकर द्वारा एआईएडीएमके के पूर्व विधायकों मरगथम कुमारवेल (मदुरांतकम), जयकुमार (पेरुंदुरई), सत्यभामा (धरापुरम) और इसाकी सुब्बैया (अंबासमुद्रम) के इस्तीफे मंजूर किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। गौरतलब है कि विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद ये चारों पूर्व विधायक तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) पार्टी में शामिल हो गए थे। दल-बदल विरोधी कानून को लेकर उठे सवाल याचिकाकर्ता और देशिया मक्कल पड़ाई काची के नेता एम. एल. रवि ने अदालत में दलील दी कि जब इन विधायकों के खिलाफ पहले से ही दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के तहत अयोग्यता की कार्यवाही लंबित थी, तो ऐसे में उनके इस्तीफे स्वीकार नहीं किए जाने चाहिए थे। याचिका में तर्क दिया गया कि अयोग्यता की कार्यवाही के बीच इस्तीफा मंजूर करना दल-बदल विरोधी कानून की मूल भावना को कमजोर करता है और यह उन मतदाताओं के जनादेश का भी अपमान है जिन्होंने उन्हें चुनकर भेजा था। सुनवाई के दौरान एआईएडीएमके के मुख्य सचेतक (व्हिप) एग्री कृष्णमूर्ति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में एक अलग याचिका भी दायर की गई है। इस याचिका के जरिए राज्य में होने वाले संभावित उपचुनावों पर रोक लगाने और चारों पूर्व विधायकों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत ही दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई है। दूसरी ओर, राज्य के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) विजय नारायण ने सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को आश्वस्त किया कि चारों पूर्व विधायकों ने स्वेच्छा से अपने इस्तीफे सौंपे थे और स्पीकर इस संबंध में पहले ही आवश्यक नोटिस जारी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और विधानसभा के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश एस. सी. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने अगली सुनवाई बुधवार तक के लिए टाल दी है। रामयश/ईएमएस 16 जून 2026