राष्ट्रीय
16-Jun-2026


नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर लगी बाधाओं में ढील मिलने से भारत को बड़ी राहत मिली है। फंसे हुए इन 34 जहाजों में से 16 जहाज उर्वरक लेकर आ रहे हैं, जिनमें 8 जहाजों में यूरिया, 4 में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट), 3 में सल्फर और 1 में अमोनिया शामिल है। इसके अलावा 15 जहाज कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी जैसी ऊर्जा आवश्यकताएं लेकर भारत की ओर आ रहे हैं। ऐसे में इन जहाजों की सुरक्षित वापसी न केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए, बल्कि देश के कृषि क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी कड़ी में कतर से तरल प्राकृतिक गैस लेकर आ रहा भारतीय ध्वज वाला जहाज ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। यह घटना न केवल एक जहाज की सफल यात्रा है, बल्कि उन दर्जनों जहाजों के लिए भी उम्मीद की किरण मानी जा रही है, जो पिछले कई महीनों से फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए थे।शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम के अनुसार, ‘दिशा’ लगभग 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इसके 18 जून तक गुजरात के दाहेज पोर्ट पर पहुंचने की संभावना है। यह तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला भारतीय ध्वज वाला एलएनजी कैरियर है। इसकी सफल यात्रा को ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इस जहाज की अहमियत इसलिए भी अधिक है क्योंकि इसके पीछे 34 अन्य भारतीय और विदेशी जहाजों की आवाजाही जुड़ी हुई है, जो अभी भी फारस की खाड़ी में रुके हुए हैं। इन जहाजों में बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों, एलएनजी और उर्वरकों की खेप लदी हुई है। ‘दिशा’ के सुरक्षित निकलने से यह उम्मीद बढ़ी है कि बाकी जहाजों के लिए भी समुद्री मार्ग धीरे-धीरे खुल सकता है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। इसके अलावा देश की एलएनजी जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक और एलपीजी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में इस रणनीतिक समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कीमतों पर पड़ता है। वैश्विक शिपिंग कंपनियां अभी भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और पूरी तरह से सामान्य संचालन में समय लग सकता है। इसके बावजूद ‘दिशा’ की सफल यात्रा को एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज क्षेत्र में गतिविधियां धीरे-धीरे सामान्य हो रही हैं। अगर आने वाले दिनों में बाकी फंसे हुए जहाज भी सुरक्षित रूप से भारत पहुंचते हैं, तो देश की ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिससे ईंधन, गैस और खाद की उपलब्धता स्थिर हो सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/16जून2026