- एआई लोगों की जगह नहीं लेगा, जो एआई इस्तेमाल करेंगे वे उनकी जगह ले लेंगे नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में आईटी, कानून, कॉमर्स, ट्रांसलेशन, डिजाइन और लाइब्रेरी साइंस जैसे क्षेत्रों में उलटफेर हुआ है। एआई टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं। एचआर कंपनी का कहना है कि 40फीसदी कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ एआई टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। 2024 की एक रिपोर्ट कहती है कि देश में 82फीसदी बीसीए और एमसीए ग्रेजुएट्स के पास एआई टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी, जो एआई टूल का इस्तेमाल करके उत्पादकता 40फीसदी तक बढ़ा सकते हैं। एक अन्य रिपोर्ट कहती है कि एआई लोगों की जगह नहीं लेगा, लेकिन जो लोग एआई का इस्तेमाल करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे, जो इस्तेमाल नहीं करते। रिपोर्ट 2025 के मुताबिक 2030 तक 22फीसदी नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से ज्यादा अंडरग्रेजुएट कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि करीब 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप खत्म हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट नहीं बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा। सिराज/ईएमएस 16जून26