राष्ट्रीय
16-Jun-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत हमेश ही शांति का पक्षधर रहा है। यही वजह है कि शांति के प्रयासों की भारत हमेशा ही सराहना करता रहा है। इस बार भी जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर आई तो भारत ने इस फैसले का स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने के संबंध में अमेरिका और ईरान के बीच हुई समझ का स्वागत करता हूं जिसने विश्व भर में गंभीर आर्थिक व्यवधान उत्पन्न किया है और अनेक देशों में जनहानि का कारण बना है। पीएम मोदी ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति से क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और नौवहन तथा व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत को आशा है कि इस समझ के कार्यान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता की पुनर्स्थापना में सहायता मिलेगी तथा नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम आशा करते हैं कि शेष मुद्दों पर विचार-विमर्श एक टिकाऊ अंतिम समझौते तक पहुंचेगा। इसके साथ ही केंद्र की मोदी सरकार ने कहा है कि वह इस बातचीत के अगले चरणों पर करीब से नजर बनाए हुए है। भारत को पूरी उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच बचे हुए अन्य विवादित मुद्दों पर भी जल्द ही विस्तृत चर्चा होगी। भारत एक ऐसे अंतिम, टिकाऊ और स्थायी समझौते का इंतजार कर रहा है जो भविष्य में इस पूरे क्षेत्र को हमेशा के लिए सुरक्षित और शांत बना सके। वहीं भारत ने अपने आधिकारिक बयान में इस बात को रेखांकित किया है कि पश्चिम एशिया के इस संकट ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया था। इस टकराव की वजह से दुनिया भर में व्यापारिक गतिविधियां ठप पड़ गई थीं, सप्लाई चेन टूट गई थी और वैश्विक स्तर पर गंभीर आर्थिक मंदी का माहौल बन गया था। इस युद्ध की आग में न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि कई अन्य देशों के निर्दोष नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है। इसलिए इस संघर्ष का रुकना बेहद जरूरी था। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में पिछले 107 दिनों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक समझौते पर सहमति व्यक्त की है। अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नौसैनिक नाकेबंदी हटाने की बात कही है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कारर्वाई तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है। वीरेंद्र/ईएमएस/16जून2026