भोपाल, 16 जून। महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रयासों और एक माँ की दृढ़ इच्छाशक्ति ने ग्वालियर की एक मासूम बच्ची को गंभीर कुपोषण के चक्रव्यूह से बाहर निकालकर स्वस्थ जीवन की राह पर ला खड़ा किया है। यह प्रेरणादायक सफलता प्रदेश में चल रहे पोषण अभियान और आंगनवाड़ी सेवाओं की प्रभावशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई है। ग्वालियर जिले की पीएचई कॉलोनी निवासी मोना की बेटी माहिका का जन्म 14 मार्च 2025 को हुआ था। कुछ महीनों बाद उसका स्वास्थ्य लगातार गिरने लगा। जनवरी 2026 में आंगनवाड़ी केंद्र पर हुए स्वास्थ्य परीक्षण में माहिका का वजन मात्र 5.5 किलोग्राम और लंबाई 68 सेंटीमीटर पाई गई, जिसके कारण उसे गंभीर कुपोषण (सैम) श्रेणी में चिन्हित किया गया। माहिका की स्थिति को देखते हुए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता माधुरी राजावत ने तत्काल उसे विशेष सी-सैम कार्यक्रम में पंजीकृत कर नियमित निगरानी शुरू की। अप्रैल में आयोजित पोषण पखवाड़ा अभियान के दौरान विभागीय अधिकारियों और आंगनवाड़ी टीम ने परिवार को पौष्टिक आहार, स्तनपान, ऊपरी भोजन और स्वच्छता के महत्व की विस्तृत जानकारी दी। माहिका की माँ मोना ने आंगनवाड़ी से मिले मार्गदर्शन को गंभीरता से अपनाया। उन्होंने टेक होम राशन का उपयोग कर पौष्टिक खिचड़ी और हलवा तैयार करना शुरू किया तथा बच्ची के मानसिक और शारीरिक विकास पर विशेष ध्यान दिया। विभागीय टीम ने नियमित गृहभेंट कर परिवार को लगातार सहयोग और प्रोत्साहन दिया। नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग, संतुलित पोषण और सतत देखभाल के परिणामस्वरूप माहिका का स्वास्थ्य तेजी से सुधरा। वर्तमान में उसका वजन और लंबाई दोनों सामान्य श्रेणी में पहुंच चुके हैं। माहिका की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि सही पोषण, जागरूकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और परिवार के सहयोग से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी विजय प्राप्त की जा सकती है। हरि प्रसाद पाल 16 जून, 2026