क्षेत्रीय
16-Jun-2026
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- धमतरी के सिवनीकला में फर्जी नामांतरण और मुआवजा घोटाले के आरोप रायपुर (ईएमएस)। भारतमाला परियोजना से जुड़े कथित भूमि और मुआवजा घोटाले का दायरा लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। अब धमतरी जिले के सिवनीकला गांव में जमीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। मामले की शिकायत एसीबी और ईओडब्ल्यू से की गई है, जिसके बाद जांच एजेंसियों ने ग्रामीणों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में ग्रामीण रायपुर स्थित एसीबी/ईओडब्ल्यू कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों के समक्ष अपने बयान दर्ज कराए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भारतमाला परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मामले में फर्जी नामांतरण, अवैध बंटवारा और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये का मुआवजा प्राप्त किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के 17 से 18 खसरों को कथित तौर पर करीब 90 हिस्सों में विभाजित कर नए रिकॉर्ड तैयार किए गए। आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वास्तविक पात्रता से अधिक लोगों को मुआवजा दिलाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा। शिकायत में राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पटवारी, जांच दल और डायवर्सन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी स्तर की रिकॉर्ड हेराफेरी संभव नहीं थी। उनका आरोप है कि योजनाबद्ध तरीके से दस्तावेजों में बदलाव कर भूमि स्वामित्व और हिस्सेदारी का स्वरूप बदला गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि वर्ष 2019 में प्रकाशित राजस्व रिकॉर्ड के बाद कई दस्तावेजों में संशोधन किए गए। आरोप है कि इन्हीं परिवर्तनों के आधार पर फर्जी नामांतरण और बंटवारा दर्शाकर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि का करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कराया गया। मामले को और गंभीर बनाते हुए शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इस पूरे प्रकरण को कुछ प्रभावशाली लोगों, भूमाफियाओं और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त व्यक्तियों का समर्थन मिला हुआ था। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। ग्रामीणों ने मामले की वित्तीय जांच की मांग करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं और अवैध लेन-देन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल एसीबी और ईओडब्ल्यू की टीम शिकायतों और दस्तावेजों की जांच कर रही है। बड़ी संख्या में ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और राजस्व रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है। गौरतलब है कि भारतमाला परियोजना से जुड़े भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण के मामलों को लेकर पहले भी प्रदेश के कई जिलों में शिकायतें सामने आ चुकी हैं। ऐसे में सिवनीकला का मामला जांच एजेंसियों के लिए एक और महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है, जिस पर प्रदेशभर की निगाहें टिकी हुई हैं। - (ईएमएस)16 जून 2026