:: यह किसानों के हक की लड़ाई, पहली लाठी मैं खाऊंगा- विपिन वानखेड़े:: इन्दौर (ईएमएस) अंश के अनुपात में मुआवजा और प्रस्तावित रेडीमेड उद्योग में किसान परिवार के सदस्य की नौकरी की मांग करते किसानों ने आज बरलाई शक्कर मिल पर हल्ला बोल प्रदर्शन किया। बरलाई सहकारी शक्कर कारखाना अंशधारक किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आज सुबह 10 से आयोजित इस हल्ला बोल प्रदर्शन में किसान बरलाई शक्कर मिल परिसर के मुख्य द्वार पर एकत्रित हुए। किसानों के इस हल्ला बोल आंदोलन को आज कांग्रेस ने उस समय और अधिक धारदार बना दिया जब जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने आंदोलनकारी किसानों के बीच पहुंचकर अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया और जिला प्रशासन को आर-पार के संकेत दिए। वानखेड़े ने प्रशासन के दमनकारी रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अगर किसानों के हक के लिए लाठी चली, तो प्रशासन को याद रखना चाहिए कि सबसे पहली लाठी मैं खाऊंगा। वहीं मौके पर प्रशासन की ओर से ज्ञापन लेने आए तहसीलदार ने किसानों से कुछ अनुचित व्यवहार किया जिसपर वानखेड़े ने तुरंत तहसीलदार को कड़ी चेतवानी देते हुए कहा की, मर्यादा में रहें और किसानों के साथ शालीनता से पेश आएं। प्रशासन को चेतावनी देते हुए वानखेड़े ने कहा, फिलहाल हम लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए नरमी से बात कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन हमारी इस शालीनता को कमजोरी न समझे। यदि किसानों की आवाज को दबाने का प्रयास जारी रहा, तो हम सुभाष चंद्र बोस के सिद्धांतों वाली गरम नीति अपनाएंगे। एक बार जब आंदोलन अपने उग्र स्वरूप में आएगा, तो प्रशासन को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा। विपिन वानखेड़े ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं इस स्थल का निरीक्षण करके गए हैं और कांग्रेस के विधायकों ने भी इस मुद्दे को विधानसभा में पुरजोर तरीके से उठाया है। इसके बावजूद प्रशासन का मौन रहना उनकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि 13 फरवरी से जारी धरने के दौरान 600 से अधिक किसान परिवारों की आवाज को प्रशासन द्वारा दबाया जा रहा है। आरटीआई में जानकारी छुपाना और जमीन के शेयर्स व रोजगार पर चुप्पी साधना प्रशासन की मिलीभगत को उजागर करता है। इस दौरान वानखेड़े ने इस आंदोलन को सक्रिय रूप से खड़ा करने में समिति के प्रमुख सदस्यों और कांग्रेस के कर्मठ साथियों मोती सिंह पटेल और हंसराज मंडलोई की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया, जिनके नेतृत्व में किसान एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। आनंद पुरोहित/ 16 जून 2026