नई दिल्ली (ईएमएस)। पंजाब में अकाल तख्त और मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच विवाद ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि केंद्र सरकार में शामिल सिख मंत्री तब तक भगवंत मान से कोई आधिकारिक मुलाकात नहीं करेंगे, जब तक वे अकाल तख्त के निर्देशों को स्वीकार कर माफी नहीं मांगते। पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि अकाल तख्त सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने भगवंत मान से मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और अकाल तख्त से क्षमा मांगने की मांग भी की। पूरा विवाद एक कथित वीडियो को लेकर शुरू हुआ, जिसमें भगवंत मान जैसे दिखने वाले व्यक्ति पर सिख गुरुओं के चित्रों के प्रति आपत्तिजनक व्यवहार का आरोप लगाया गया। अकाल तख्त ने फोरेंसिक जांच के आधार पर वीडियो को एआई जनित या फर्जी नहीं माना और भगवंत मान को गुरु-द्रोही तथा खालसा पंथ विरोधी घोषित कर दिया। साथ ही सिख समुदाय से उनसे दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। हालांकि भगवंत मान और आम आदमी पार्टी ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। पार्टी का कहना है कि जांच से यह साबित नहीं हुआ कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वास्तव में भगवंत मान ही हैं। आम आदमी पार्टी ने शिरोमणि अकाली दल और बादल परिवार पर धार्मिक संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग करने का आरोप लगाया है। इस बीच अकाल तख्त ने पंजाब मंत्रिमंडल को भी 29 जून को पेश होने के लिए तलब किया है। माना जा रहा है कि यह विवाद 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। सुबोध/१६ -०६-२०२६