भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है-“मातृदेवो भव, पितृदेवो भव” केवल
बिहार के नालंदा जिले में स्थित शीतला मंदिर नालंदा में मंगलवार को घटी भगदड़ की घटना ने
-भिक्षुक महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और युवाओं का भीख मांगना मजबूरी,पेशा या फिर आदत? सरकारों
भारत ने लंबे समय तक जिस आंतरिक चुनौती का सामना किया वह नक्सलवाद के रूप में देश के अनेक
भारत की सर्वोच्च साहित्यिक संस्थाओं में से एक, साहित्य अकादमी द्वारा LGBTQ लेखक सम्मेलन
मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य है। यह केवल भोग-विलास या क्षणिक सुखों के लिए नहीं
हरेक व्यक्ति में चाहे वह जैसा भी हो, एक विशेष प्रकार की श्रद्धा पाई जाती है। लेकिन उसके
शुभ संवत 2083, शाके 1948, सौम्य गोष्ठ, वैशाख कृष्ण पक्ष, बसंत ऋतु, गुरु उदय पूर्वे, शुक्रोदय पश्चिमे
एक मुर्ख खुद को बुद्धिमान समझता है, लेकिन बुद्धिमान व्यक्ति खुद को मुर्ख समझता है। - विलियम
नक्सलवाद भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए लंबे समय से एक गंभीर चुनौती रहा है। यह केवल कानून-व्यवस्था