आज का समय तकनीक का समय है, या यूँ कहें कि हम तकनीक के युग में सांस ले रहे हैं। यह तकनीक ही
ऐतिहासिक महाकाव्यों को संस्कृति की आत्मा माना जाता है, जिनमें समझने और लागू करने लायक
अपने शुद्ध आत्म स्वरूप को पहचान कर जगत के बंधन को तोड कर चेतन लोक को गमन करो। शरीर के अंदर
भारत आदि-अनादि काल से ही संस्कारों की खान रहा है। यहां की मिट्टी में ही गॉड गिफ्टेड संस्कारों
एक साधु बहुत बूढ़े हो गए थे। उनके जीवन का आखिरी क्षण आ पहुंचा। आखिरी क्षणों में उन्होंने
शुभ संवत 2082, शाके 1947, सौम्य गोष्ठ, फाल्गुन शुक्ल पक्ष, शिशिर ऋतु, सूर्योदय पूर्वे, गुरु उदय
बुद्धिमान व्यक्ति दूसरों की गलती से सीखता है - पी सायरस स्वत: कुछ नहीं होता सब कुछ करना पड़ता है - जै. एफ. कैनेडी ईएमएस / - 18 फरवरी 26
देश भर में हर साल करीब आठ लाख जैसे बड़ी तादाद में लोग लापता हो जाते हैं, जिनमें ज्यादातर
हाल ही में राज्यसभा में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जो जानकारी राज्यसभा में
एक दार्शनिक समस्याओं के अत्यंत सटीक समाधान बताते थे। एक बार उनके पास एक सेनापति पहुंचा