18 जनवरी यादगार दिवस पर विशेष) दादा लेखराज जो अपनी रूहानी सेवा व परमात्म बोध के कारण ब्रह्माबाबा
भारतीय न्याय,सांस्कृतिक नैतिकता और विधवा बहू का अधिकार-मनुस्मृति से संविधान तक एक समावेशी
दुनिया में अजीबोगरीब खेल हो रहे हैं। लोग अपने अपने तरीकों से इस खेल की व्याख्या करते
एक वरिष्ठ पत्रकार चिंतक संपादक जी ने फेसबुक पर लिखा है - कल खिचड़ी खाने के पूर्व पाँच
भारत की विदेश नीति का सवाल केवल इस बात का नहीं है कि हम विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का कैसे
खंडित फैसले से उठे सवाल,अब बड़ी पीठ पर टिकी देश की निगाहें भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध
मनुष्य का बाह्य जीवन वस्तुत: उसके आंतरिक स्वरूप का प्रतिबिम्ब मात्र होता है। जैसे ड्राइवर
शुभ संवत 2082, शाके 1947, सौम्य गोष्ठ, माघ कृष्ण पक्ष, हेमंत ऋतु, गुरु उदय पूर्वे, शुक्रास्त पूर्वे
दुनिया का अस्तित्व शस्त्रबल पर नहीं, सत्य, दया और आत्मबल पर है। - महात्मा गांधी बड़ा सोचे, जल्दी सोचे, आगे सोचे विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। - धीरूभाई अंबानी ईएमएस /17 जनवरी 26
(यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा (सी3एस) द्वारा जलवायु परिवर्तन को लेकर