ईरान में बार-बार उभरती उथल-पुथल केवल किसी एक घटना, किसी एक फैसले या किसी एक पीढ़ी का आक्रोश
अब इसे प्रजातांत्रिक प्रणाली का अभिशाप कहे या वरदान कि इस शासन प्रणाली के तहत् प्रदेश
विदेश मे जाकर नौकरी रोजगार कर बेशुमार दौलत कमाने का सपना किसे अच्छा नही लगता है? अच्छे
हाल ही में दक्षिण भारत के बैंगलुरू ब्रह्माकुमारीज केंद्र पर राजयोगी बीके मृत्युंजय
पिछले सत्रह से अठारह दिनों से ईरान की सड़कों पर जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, वे केवल किसी
केवल ज्ञान की बातें करों। किसी व्यक्ति के बारे में दूसरे व्यक्ति से सुनी बातें मत दोहराओ।
शुभ संवत 2082, शाके 1947, सौम्य गोष्ठ, माघ कृष्ण पक्ष, हेमंत ऋतु, गुरु उदय पूर्वे, शुक्रास्त पूर्वे
ना तो कोई किसी का मित्र है ना ही शत्रु है। व्यवहार से ही मित्र या शत्रु बनते हैं। - हितोपदेश
रेल यात्रियो के लिए आराम दायक यात्रा,अध्यात्म का आनंद-आर्थिक विकाश की बहार है,जहाँ यात्रा
स्वामी विवेकानंद जी ने यह बात कही है कि-पुस्तकें वह दीपक हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर