भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि यहां हर वर्ग को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त
वैश्विक स्तरपर भारत आज स्वयं को 21वीं सदी की उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर
महात्मा बुद्ध ने अपने शिष्यों को दीक्षा देने के बाद कहा,तुम जहां भी जाओगे, वहां तुम्हें
शुभ संवत 2083, शाके 1948, सौम्य गोष्ठ, द्वितीय ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष, ग्रीष्म ऋतु, गुरु उदय पूर्वे,
मनुष्य अपने जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्म से महान बनता है। चाणक्य बड़ा सोचे, जल्दी सोचे, आगे सोचे विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है। धीरूभाई अंबानी ईएमएस / 09 जून 26
‘‘ आंदोलन से उठते कुछ सुलगते, उगलते और अनसुलझे सवाल।’’ ‘‘ भूमिका ’’। राजनीति में कभी-कभी
कला केवल रंगों, रेखाओं और आकृतियों का संयोजन नहीं होती, वह जीवन की अनुभूतियों, संबंधों
गंगा नदी का कटाव एक विकराल समस्या है, जो हर साल सैकड़ों किसानों और परिवारों को बेघर कर
(9 जून : अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस पर विशेष) ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों के संरक्षण
भारतीय राजनीति का एक सीधा सा नियम है। एक समझदार नेता वह नहीं है जिसे सिर्फ आगे बढ़ना आता