मन को जीवन का केंद्रबिंदु कहना असंभव नहीं है। मनुष्य की क्रियाओं, आचरणों का प्रारंभ मन
शुभ संवत 2082, शाके 1947, सौम्य गोष्ठ, फाल्गुन कृष्ण पक्ष, शिशिर ऋतु, गुरु उदय पूर्वे, शुक्रोद्रय
अपनी खुशियों की प्रत्येक पल का आनंद लें क्योंकि यह बुढ़ापे का अच्छा सहारा है - क्रस्टोफर
हमारी सनातन भारतीय संस्कृति में एक अत्यंत गूढ़ और सार्थक पंक्ति कही गई है-मन के हारे
हरिद्वार में होने जा रहे कुंभ 2027 की तैयारियां शुरू हो चुकी है।कुंभ मेलाधिकारी की नियुक्ति
नीति-निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और संसदीय विमर्श जैसे गंभीर विषय किसी भी लोकतंत्र की
आज मोबाइल के युग में मन में अशांति रहती है हमारी ऑंखें प्रतिपल संसार में पूर्णता खोज
भारत के सामाजिक विकास की यात्रा में महिलाओं की स्थिति हमेशा एक निर्णायक कसौटी रही है।
वैश्विक स्तरपर मानव सभ्यता की प्रगति के साथ -साथ मानसिक,सामाजिक और आर्थिक जटिलताएँ भी
भगवद्गीता में कर्म को जीवन का मूल आधार बताया गया है। गीता के अनुसार मनुष्य बिना कर्म