ना तो कोई किसी का मित्र है ना ही शत्रु है। व्यवहार से ही मित्र या शत्रु बनते हैं। - हितोपदेश
रेल यात्रियो के लिए आराम दायक यात्रा,अध्यात्म का आनंद-आर्थिक विकाश की बहार है,जहाँ यात्रा
स्वामी विवेकानंद जी ने यह बात कही है कि-पुस्तकें वह दीपक हैं जो अज्ञान के अंधकार को दूर
साबरमती रिवरफ्रंट से जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज
हिंसा का स्वरूप बदलना,अधिक विकेंद्रित, अनियोजित, व्यक्तिगत या भीड़-आधारित होना,समाज
इन दिनों देश के अनेक भागों में कड़ाके की ठंड पड़ने से तापमान शून्य से भी नीचे चला गया है।
हम मनुष्यों की एक सामान्य सी आदत है कि दु?ख की घड़ी में विचलित हो उठते हैं और परिस्थितियों
शुभ संवत 2082, शाके 1947, सौम्य गोष्ठ, माघ कृष्ण पक्ष, हेमंत ऋतु, गुरु उदय पूर्वे, शुक्रास्त पूर्वे
पराजय से सत्याग्रही को निराशा नहीं होती, बल्कि कार्यक्षमता और लगन बढ़ती है। - महात्मा
प्रसिद्ध हिंदी लेखक, पत्रकार और पटकथा लेखक कमलेश्वर ने सम्मान,एवार्ड अथवा पुरस्कार