राज्य
03-Dec-2025
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- अध्यक्ष का खेल पदाधिकारियों को भनक तक नहीं भोपाल (ईएमएस)। राजधानी भोपाल के जाने माने बिल्डर्स अमृत कॉलोनाइजर्स और रखरखाव समिति अध्यक्ष की कथित सांठगांठ का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। अमृत कॉलोनाइजर्स द्वारा नर्मदापुरम रोड स्थित कटारा ग्राम के समीप करोड़ों की लागत से बनाई गई पेबल-बे कॉलोनी में आज तक विकास कार्य अधूरे पड़े हैं, लेकिन नवंबर 2022 में कॉलोनी को स्टांप पेपर पर पेबल बे फेज - 1 रहवासी रखरखाव सहकारी समिति मर्यादित को हैंडओवर कर दिया गया। हैरत की बात यह कि समिति के 11 में से एक भी सदस्य को इस गुपचुप हैंडओवर की जानकारी नहीं थी। दस्तावेज़ पर केवल समिति अध्यक्ष प्रदीप राय के हस्ताक्षर पाए गए हैं। ये समिति 2022 में बनाई गई थी। -रहवासी बोले- हमें 3 साल बाद पता चला! रहवासियों के का कहना है कि 2015–16 से कॉलोनी में रहने वाले लोगों को यह राज सितंबर 2025 की समिति की साधारण सभा में खुला। जब करोड़ो के अधूरे कामों का मुद्दा उठा, तो समिति अध्यक्ष प्रदीप राय ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि कॉलोनी में बिल्डर्स का कोई रोल नहीं है। “कॉलोनी तो 9 नवंबर 2022 को ही समिति को हैंडओवर कर दी गई है।” जब रहवासी और समिति के पदाधिकारी बिल्डर्स के पास पहुंचे तो बिल्डर ने कॉलोनी हैंडओवर के दस्तावेज दिखा दिए जिस पर समिति अध्यक्ष प्रदीप राय के हस्ताक्षर थे। हैंडओवर सिर्फ 1000 रुपये की नोटरी पेपर पर किया गया, जबकि नियमों के अनुसार समिति की बैठक, प्रस्ताव, कोरम और सभी पदाधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं। -करोड़ों के काम अधूरे, हिसाब गायब रहवासियों के अनुसार कॉलोनी में आज भी मल्टी लिफ्ट्स, एसटीपी प्लांट, क्लब हाउस, फायर एनओसी, सड़कें, ड्रेनेज सिस्टम, स्ट्रीट लाइट, गार्डन, जैसी मूलभूत सुविधाएँ अधूरी हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया गया, लेकिन न कोई कार्य पूर्ण, न कोई हिसाब-किताब। - जवाब देने के बजाय बिल्डर ने उठा ली ‘केस की ढाल’ अधूरे कामों और फर्जी हैंडओवर पर जवाब देने की बजाय बिल्डर अब समिति के ही पदाधिकारियों पर केस दर्ज कराने में जुट गया है। रहवासियों का आरोप है कि यह कार्रवाई सच्चाई दबाने और जिम्मेदारी से बचने की चाल है। - सुनवाई में नहीं सुनी गई बात, अधिकारी मीटिंग छोड़ भागे जब कहीं सुनवाई नहीं हुई तो पूरा मामला फर्म एवं सोसायटी रजिस्ट्रार के सामने रखा और समिति अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी दिया। लेकिन आरोप है कि रजिस्ट्रार की और से सुनवाई अधिकारी मुकेश गुप्ता ने न कोई कागज़ देखा, न रहवासियों की दलील सुनी, और बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए। रहवासी इसे बिल्डर की कथित पहुँच और दबाव का नतीजा बता रहे हैं। - “न्याय चाहिए, फर्जी हैंडओवर नहीं”- रहवासी समिति के पदाधिकारियों और कॉलोनी वासियों का कहना है कि “हम कॉलोनी के हैंडओवर की पूरी सच्चाई सामने लाकर रहेंगे। अधूरे काम पूरे हों, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो, यही हमारी मांग है।” वे अब इस पूरे प्रकरण को जिला प्रशासन, रजिस्ट्रार कार्यालय, रेरा, ईओडब्लू और न्यायालय तक ले जाने की तैयारी में हैं। रहवासियों का कहना है कि “जब तक सच सामने नहीं आता, लड़ाई जारी रहेगी।”