राज्य
19-Jan-2026
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वर्तमान हमारे अतीत का संस्कार है : प्रमाण सागर जी जबलपुर (ईएमएस)। भावआधार है तथा विचार उसकी अभिव्यक्ति हैकर्म कोई दैवीय दंड नहीं, कर्म कोई कल्पना नहीं,कर्म कोई रहस्य नही,कर्म ऐसा विज्ञान है,जो हमारे समग्र जीवन को व्यवस्थापित और संचालित करता है,उपरोक्त उदगार मुनि प्रमाणसागर महाराज ने डी.एन. जैन महाविद्यालय में बने विशेष पांडाल से कर्म का विज्ञान सफलता का सही मार्ग विषय पर संबोधित करते हुये व्यक्त कर रहे थे। मुनि श्री ने साठ मिनट तक चले अपने सम्बोधन में कहा कि सभी लोग सफलता चाहते है,लेकिन हर व्यक्ती सफल नहीं हो पाता तो वह जिंदगी से हार मानकर अवसाद में उलझ जाता है, मुनि श्री ने कहा कि बबूल का पेड़ लगाकर उससे आम फल की अपेक्षा अनुचित है? कहावत हैबोया बीज बबूल का तो आम कंहा से आये न भूतो न भविष्यति उन्होंने कारण और कार्य व्यवस्था की बात करते हुये कहा कि जैसे सही बीज से ही सही फल की प्राप्ति होती है,उसी प्रकार सही प्रयत्न करने पर ही सही परिणाम हमारे हाथ में आते है उन्होंने कर्म के विज्ञान को मोबाईल से जोड़ते हुये कहा किमोबाईल में जैसा डेटा डालते है, वैसा इनपुट मिलेगा जैसा कमांड दोगे वैसा आऊटपुट निकलता है अनेक प्रकार के एप्स होते उसमें जिन एप को आप डाऊनलोड करते हो उसमें उसी प्रकार की सामग्री मिलती है, मुनि श्री ने कहा कि मोबाईल का यह डेटा ही हमारे भाव है,ऐप अर्थात हमारे विचार,कमांड मतलब हमारी प्रवत्तियां और आऊटपुट अर्थात हमारा जीवन मुनि श्री ने कहा कि अपने भाग्य को कोसने से कुछ नहीं मिलेगा कमांड और एप्लिकेशन को संभालो हमारा वर्तमान हमारे अतीत का संस्कार है,और आज का संस्कार हमारा भविष्य बनायेगा इस बात को सदैव याद रखो, भाव- विचार- कर्म- और फल की बात करते हुये मुनि श्री ने कहा कि अक्सर लोग कहते है कि भगवान हमारी नहीं सुनता? का उत्तर देते हुये कहा कि भगवान की तुम कहा सुनते हो? भगवान तुम्हारी हरकतों को जानते है,इसलिये उन्होंने पूरा ठेका कर्म को दे रखा है भगवान सिर्फ उसी की सुनते है ,जो भगवान की सुनता है, तथा भगवान की मानता है मुनि श्री ने मिथ्यात्व और समयक्तव को पहचानो जीवन की वास्तविकता को पहचानना ही समयक्तव है,और भ्रम को सत्य मानना ही मिथ्यात्व है उन्होंने कहा कि 24 घंटे में न जाने आप वाणी, और व्यवहार, में कितना असंयम करते हो यह कम कीजिये इन्हीं से कर्म बंधते है, कर्म यदि खेल खिला रहा है,तो दूसरों को दोष मत दो अपनी दिशा बदल लो, परिस्थितियों को मत कोसो परिस्थितियां तो तुम्हारी प्रवत्तियों का ही फल है, जड़ को पकड़ो आज यदि अपनी प्रवत्तियों को बदलोगे तो कल तुम्हारी परिस्थितियों में भी परिवर्तन आ जाऐगा। मुनि श्री ने कहा कि सफलता का आधार धन संपत्ति पद प्रतिष्ठा में नहीं सफलता तभी है जब इनके रहने और न रहने पर मन की प्रसन्नता टिकी रहे। सफलता मन की प्रसन्नता और संतोष में है जिसके जीवन में कर्म के सिद्धांत का बोध होता है वह हर स्थिति में शिकायत नहीं संतोष प्रकट करता है, इस अवसर पर मुनि श्री संधानसागर महाराज एवं संघस्थ क्षुल्लक मंचासीन थे। संचालन अभय आदित्य एवं अमित पड़रिया ने किया। मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी एवं सुवोध कामरेड ने बताया मुनि श्री के द्वारा जबलपुर में आगामी 25 जनवरी को भावनायोग का महाआयोजन पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम राईट टाऊन में किया जा रहा है, यह सत्र प्रातः8 बजे से10 बजे तक चलेगा। सुनील साहू / मोनिका / 19 जनवरी 2026/ 06.18