व्यापार
22-Jan-2026
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- गैर-बैंकिंग और बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र को अधिक वित्त ‎मिला नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मासिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर के दौरान गैर-बैंकिंग स्रोतों और बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसे अर्थव्यवस्था में मांग की स्थिति में सुधार का संकेत माना जा रहा है, जहां ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में धीरे-धीरे मजबूती देखने को मिल रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों में वाणिज्यिक क्षेत्र को वित्तीय संसाधनों से कुल आवक बढ़कर 30.8 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 21.8 लाख करोड़ रुपये थी। पूरे वित्त वर्ष 2024-25 में यह आवक 35.09 लाख करोड़ रुपये रही थी, जबकि इससे पहले के वर्ष में 34.04 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि गैर-बैंक स्रोतों में कॉरपोरेट बॉन्ड जारी करना और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) शामिल है, जिनमें चालू वित्त वर्ष के दौरान तेजी देखी गई है। इसके साथ ही बैंकिंग स्रोतों से भी ऋण प्रवाह में बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई के अनुसार 2025-26 के जीडीपी के पहले अग्रिम अनुमानों से भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती झलकती है। निजी अंतिम खपत व्यय और नियत निवेश जैसे घरेलू कारकों ने बाहरी चुनौतियों के बावजूद आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 7.3 प्रतिशत रहने की संभावना है, जो पिछले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में बताया गया कि दिसंबर में डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट आई, जिसका कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता रही। इसके बावजूद आरबीआई ने भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण जताया है और कहा है कि भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहेगा। सतीश मोरे/22जनवरी ---