अंतर्राष्ट्रीय
23-Jan-2026


लंदन,(ईएमएस)।बीते चार साल में दुनियाभर में शराब की खपत में तेज गिरावट देखी गई है। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बाजारों में डियागो, पर्नोड रिकर्ड, रेमी क्वाइंट्रेयू और ब्राउन फोर्मेन जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 75 प्रतिशत तक टूटे हैं और उद्योग का मूल्यांकन 74 लाख करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। जागरुकता, बदलती जीवनशैली और महंगाई इसके प्रमुख कारण हैं। अब ये कंपनियां नॉन-अल्कोहलिक उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं। डियाजियो ने ‘रिचुअल जीरो प्रूफ’ खरीदा है, जबकि कार्लसबर्ग और कंपारी-मिलानो ने भी इसतरह ब्रांड लांच किए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 50 प्रमुख शराब ब्रांडों के शेयर जून 2021 से औसतन 46 प्रतिशत गिरे हैं। वहीं, भारत में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है। 2005 में प्रति व्यक्ति खपत 2.4 लीटर से बढ़कर 2016 में 5.7 लीटर हो गई, 2030 तक 6.7 लीटर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत का शराब बाजार 60 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। चार साल में यूनाइटेड स्पिरिट्स, रेडिको खेतान और ग्लोबस स्पिरिट्स के शेयर 14 गुना बढ़े हैं। राज्यों को शराब बिक्री से 19,730 करोड़ राजस्व मिला है। आशीष दुबे / 23 जनवरी 2026