अबू धाबी(ईएमएस)। अबू धाबी में शुक्रवार को रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच एक अत्यंत महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय वार्ता शुरू हुई। लगभग चार साल से जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित शांति योजना के तहत रूस और यूक्रेन के बीच पहली आमने-सामने की सीधी बातचीत है। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की मेजबानी में हो रही यह चर्चा दो दिनों तक चलेगी, जिसका घोषित उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा देना और इस लंबे संकट का एक ठोस राजनीतिक समाधान खोजना है। हालांकि, बातचीत के पहले ही दिन रूस ने अपने सख्त रुख को स्पष्ट कर दिया है। क्रेमलिन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि वह युद्ध खत्म करने के बदले पूर्वी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेनाओं की पूर्ण वापसी की अपनी मांग से पीछे नहीं हटेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दोहराया कि यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र छोड़ना ही होगा और यह किसी भी समझौते की एक अनिवार्य शर्त है। वर्तमान में डोनबास के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर यूक्रेन का नियंत्रण है, और उसने रूसी सेना की इस शर्त को बार-बार सिरे से खारिज किया है। इस कड़े रुख के कारण शांति वार्ता के भविष्य पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं। यूक्रेन के सहयोगी देश जर्मनी ने भी मॉस्को की समझौता करने की इच्छाशक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने स्वीकार किया है कि क्षेत्रीय अखंडता का मुद्दा इस वार्ता का मुख्य केंद्र होगा। उन्होंने डोनबास को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि यह चर्चा एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका परिणाम क्या होगा, यह अभी पूरी तरह अनिश्चित है। जेलेंस्की ने जहां एक ओर युद्ध समाप्ति की उम्मीद जताई, वहीं दूसरी ओर इस प्रक्रिया में रूसी बाधाओं के आने का डर भी प्रकट किया। यह वार्ता ट्रंप की दावोस में जेलेंस्की से मुलाकात और अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ की पुतिन के साथ हालिया बातचीत के बाद संभव हो पाई है। अबू धाबी में जारी इस रणनीतिक बैठक में यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तम उमेरोव कर रहे हैं, जिसमें कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। रूस की ओर से एक शक्तिशाली सैन्य प्रतिनिधिमंडल भेजा गया है, जिसमें जीआरयू खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव भी शामिल हैं। वहीं, रूसी आर्थिक दूत किरिल दिमित्रीव के अमेरिकी अधिकारियों के साथ अलग से चर्चा करने की उम्मीद है, जिससे संकेत मिलते हैं कि वार्ता में सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक पहलुओं पर भी मंथन होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/24जनवरी2026 -----------------------------------