राष्ट्रीय
24-Jan-2026


ईरान और चीन से आ रही है सस्ती केसर कैलिफोर्निया और न्यूजीलैंड से बादाम का आयात श्रीनगर (ईएमएस)। कश्मीर की घाटी केसर, सेव और बादाम के लिए सारी दुनिया में पहचानी जाती है। पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर के लोगों को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। जिसके कारण कश्मीर के किसानों की खेती का रकवा लगातार घट रहा है। केसर की खेती का रकवा 83 फ़ीसदी घट गया है। जिसके कारण घाटी के केसर उत्पादकों में भारी निराशा देखने को मिल रही है। पिछले 10 वर्षों में बादाम का रकवा 12374 हेक्टेयर से घटकर 4000 हेक्टेयर रह गया है। बादाम का उत्पादन 15183 टन से कम होकर 9898 टन रह गया है। केसर का भी यही हाल है। पिछले दो दशकों से केसर की खेती कम होती चली जा रही है। 23000 हेक्टेयर से घटकर अब 4000 हेक्टेयर में केसर की खेती हो रही है। घाटी के किसान बादाम और केसर के स्थान पर सेव की फसल पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। आयात ने तोड़ी कमर कश्मीर की केसर 2.50 से 3 लाख रुपए प्रति किलो बिकती है। वहीं ईरान से आने वाली केसर 1.50 लाख तथा चीन से आने वाली केसर 80000 रुपए किलो मे बिक रही है। जिसके कारण कश्मीर घाटी के किसानों को केसर के दाम नहीं मिल पा रहे हैं। कश्मीर घाटी की केसर सबसे अच्छी क्वालिटी की है। महंगी होने के कारण इसकी बिक्री दिन प्रतिदिन घटती चली जा रही है। कैलिफोर्निया और न्यूजीलैंड से बड़े पैमाने पर बादाम भारत आ रही है। आयातित बादाम आकार में बड़ी है। यह बाजार में 600 से ₹800 प्रति किलो में उपलब्ध है। जबकि कश्मीर घाटी की बादाम 900 से 1400 रुपए किलो तक बिकती थी। कश्मीर घाटी के व्यापारियों का कहना है, विदेशी बादाम से पहले तेल निकाल लिया जाता है। उसके बाद उसे निर्यात किया जाता है। जिसके कारण आयातित बादाम की लागत कम हो जाती है। कश्मीर में बादाम से तेल निकालने का कोई उपक्रम नहीं होता है। कश्मीर की बादाम आकार में छोटी होती है। दाम ज्यादा होने के कारण आयातित बादाम भारत में ज्यादा बिक रही है। जिसका असर अब घाटी के किसानों पर पड़ रहा है। उनकी आर्थिक हालात दिनों दिन खराब होती जा रही है। किसान अब वैकल्पिक खेती की ओर ध्यान देने लगे हैं। एसजे/ 24 जनवरी /2026