बिलासपुर (ईएमएस)। वसंत ऋतु के उल्लास और ज्ञान के प्रकाश से ओतप्रोत वातावरण में आज महाविद्यालय चिकित्सालय सिम्स, बिलासपुर में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुई। यह पावन आयोजन सिम्स के ऊर्जावान अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति के करकमलों से सम्पन्न हुआ, जिसमें चिकित्सालय परिसर भक्तिमय भाव और सांस्कृतिक गरिमा से सराबोर नजर आया। पूजा के अवसर पर डॉ. रमणेश मूर्ति ने बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन, नवजीवन, और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की उपासना का प्रतीक है। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, सरस्वती पूजा करते हैं, नए कार्यों का शुभारंभ करते हैं और पतंगबाजी जैसे उत्सव मनाते हैं, जो प्रकृति के नवजागरण और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माने जाते हैं। पूरे पूजा कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, श्रद्धा और अनुशासन का वातावरण बना रहा। मां सरस्वती के समक्ष ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की कामना के साथ विधिवत आरती और पूजा-अर्चना की गई। इस गरिमामय अवसर पर वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. भूपेंद्र कश्यप, डॉ. एंटनी राका बेन, डॉ. लखन सिंह, डॉ. जयपाल चंद्रवंशी, डॉ. कमलजीत बाशन, पंडित रघुनंदन प्रसाद दुबे, दिनेश निर्मलकर, कमलेश दीवान, फेकू चंद्राकर, शत्रुघ्न वस्त्रकर, दिलीप यादव, इकबाल राम, कुसुम, रंजू निर्मलकर सहित चिकित्सालय के अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के दौरान सिम्स परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का वातावरण स्पष्ट रूप से देखने को मिला, जहां चिकित्सा, शिक्षा और सेवा भाव एक साथ समाहित नजर आए। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 24 जनवरी 2026