राष्ट्रीय
24-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। अमेरिकी शेयर बाजार नियामक एसईसी और भारत के विधि मंत्रालय के बीच गौतम अडाणी और उनके भतीजे सागर अडाणी को समन भेजने को लेकर गतिरोध पैदा हुआ है। मंत्रालय ने तकनीकी आपत्तियों का हवाला देकर दो बार समन तामील करने से इंकार किया, जिसके बाद एसईसी ने अब अमेरिकी अदालत से ईमेल के जरिए नोटिस भेजने की अनुमति मांगी है। दस्तावेजों के अनुसार, भारत सरकार ने मई और दिसंबर 2025 में दो अलग-अलग मौकों पर समन लौटा दिए। पहली बार मई 2025 में समन लौटाया गया था। मंत्रालय ने कहा कि एसईसी के कवर लेटर पर इंक सिग्नेचर (असली हस्ताक्षर) नहीं थे और जरूरी फॉर्म पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी थी। दूसरी आपत्ति दिसंबर 2025 में दर्ज हुई थी। भारत के विधि मंत्रालय ने एसईसी के ही एक आंतरिक नियम का हवाला देकर कहा कि समन जारी करना एसईसी के उन प्रवर्तन टूल की श्रेणी में नहीं आता जो इस नियम के तहत कवर होते हैं। सरल शब्दों में, मंत्रालय ने एसईसी के समन जारी करने के अधिकार पर ही तकनीकी सवाल उठाए। एसईसी ने न्यूयॉर्क की अदालत में दी गई अपनी अर्जी में भारत सरकार के मंत्रालय के तर्कों को निराधार बताया है। एसईसी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समन भेजने के लिए किसी विशेष मुहर या इंक सिग्नेचर की अनिवार्यता नहीं है। एसईसी ने दावा किया है कि जिस अमेरिकी नियम का हवाला भारत ने दिया है, वह एसईसी की आंतरिक जांच प्रक्रिया के लिए है न कि अंतरराष्ट्रीय समन भेजने की उसकी कानूनी शक्ति के लिए। वहीं अडाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों को आधारहीन बताया है। ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजारों को स्पष्ट किया कि कंपनी इस कानूनी कार्यवाही में कोई पक्ष नहीं है। उनके खिलाफ रिश्वतखोरी या भ्रष्टाचार के आरोप नहीं लगाए गए हैं। एसईसी की यह कार्यवाही सिविल प्रकृति की है, न कि आपराधिक प्रकरण की। इस खबर के सामने आने के बाद शुक्रवार को अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। ग्रुप की कुल मार्केट कैप में करीब 1 लाख करोड़ की कमी आई, जिसमें अडाणी ग्रीन के शेयर सबसे ज्यादा (करीब 14.6 प्रतिशत) गिरे। आशीष दुबे / 24 जनवरी 2026