राष्ट्रीय
24-Jan-2026
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-विपक्ष हुआ हमलावर, कांग्रेस और सपा ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में आगामी जनगणना को लेकर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। जनगणना की अधिसूचना में जाति का अलग कॉलम न होने को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्षी दलों ने इसे जातिगत जनगणना को लेकर सरकार की कथनी और करनी में अंतर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीयत पर भी सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा जातिगत जनगणना की बात तो करती है, लेकिन व्यवहार में उससे पीछे हटती नजर आ रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, कि नई अधिसूचना में जाति के लिए कोई कॉलम नहीं है, जो सरकार के इरादों पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी जो कहते हैं, उसका ठीक उल्टा करते हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा पहले बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन फैसले लेने के समय बिना सोचे-समझे कदम उठाती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, प्रधानमंत्री जब कुछ कहते हैं तो यह मान लेना चाहिए कि व्यवहार में उसका उलटा ही होगा। सपा ने साजिश करार दिया इससे पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था। अखिलेश यादव ने जातिगत जनगणना न किए जाने को पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समाज के खिलाफ साजिश करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि जब जनगणना की अधिसूचना में जाति का कॉलम ही नहीं है तो सरकार गिनती क्या करने जा रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना को लेकर भाजपा का रुख केवल एक राजनीतिक ‘जुमला’ है। गौरतलब है कि लंबे समय से विपक्षी दल जातिगत जनगणना की मांग करते आ रहे हैं और इसे सामाजिक न्याय तथा नीतिगत फैसलों के लिए जरूरी बता रहे हैं। वहीं केंद्र सरकार का अब तक यह रुख रहा है कि जनगणना एक जटिल प्रक्रिया है और सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। अधिसूचना सामने आने के बाद विपक्ष के हमलों से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में जातिगत जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहने वाला है। हिदायत/ईएमएस 24जनवरी26