राष्ट्रीय
24-Jan-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। कांग्रेस के सीनियर नेता और सांसद शशि थरूर के पार्टी नेतृत्व से नाराज होने की खबरों ने केरल कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति में हलचल मचा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कोच्चि में हाल ही में आयोजित पार्टी की महापंचायत के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के व्यवहार से सांसद थरूर खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्घाटन राहुल गांधी ने किया था और मंच पर मौजूद कई नेताओं के नाम लेकर उन्होंने भाषण की शुरुआत की थी, लेकिन थरूर का नाम का ज्रिक तक नहीं किया। इतना ही नहीं, पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने उनसे औपचारिक अभिवादन भी नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम से पहले राज्य पार्टी नेतृत्व ने थरूर से आग्रह किया था कि वे राहुल गांधी के मंच पर पहुंचने से पहले ही अपना भाषण समाप्त कर दें। थरूर (जो कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) के सदस्य हैं) ने इसका पालन कर राहुल गांधी के मंच पर आने के कुछ ही मिनटों बाद अपना संबोधन खत्म किया। हालांकि, इसके बाद कम से कम छह अन्य नेताओं (जिसमें कुछ सीडब्ल्यूसी सदस्य भी नहीं थे) को राहुल गांधी की मौजूदगी में बोलने का मौका मिला, जिससे थरूर को आश्चर्य हुआ और वे खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे। वहीं सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में करीब 12 नेताओं के नाम लिए, लेकिन थरूर के नाम का उल्लेख नहीं किया। इसके बाद थरूर ने अपनी नाराजगी पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाई। उन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की केरल प्रभारी दीप दासमुंशी और महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल को सूचित किया कि वे शुक्रवार को होने वाली पार्टी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे, क्योंकि उन्हें कोझिकोड में केरल लिटरेचर फेस्टिवल में जाना है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि वेणुगोपाल और दासमुंशी थरूर की नाखुशी और नाराजगी से पहले से अवगत थे। सूत्रों के मुताबिक थरूर का मानना है कि वे अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं कर सकते और पार्टी उन्हें हल्के में नहीं ले सकती है। दरअसल 23 जनवरी 2026 को हुई बैठक (जिसकी अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने की और जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे) आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से बेहद अहम रही है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी हाईकमान ने राज्य नेतृत्व को निर्देश दिया कि सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग की बातचीत सौहार्दपूर्ण ढंग से पूरी करे और उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया भी सुचारू रहे। कांग्रेस परंपरागत रूप से चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के चेहरे का ऐलान नहीं करती, लेकिन पार्टी को अभियान और घोषणापत्र समितियों सहित अहम चुनावी पैनलों का गठन करना होगा, ताकि संगठनात्मक तालमेल और चुनावी रणनीति में एकजुटता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, शशि थरूर की नाराज़गी ने केरल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और समन्वय से जुड़े सवालों को एक बार फिर सामने ला दिया है, जिससे पार्टी के लिए आने वाले दिनों में संतुलन साधना एक अहम चुनौती बन सकती है। आशीष दुबे / 24 जनवरी 2026