राष्ट्रीय
24-Jan-2026


नई दिल्ली,(ईएमएस)। साल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर पाकिस्तानी डिजिटल कंटेंट पर प्रतिबंध लगा दिया था। आदेश था कि सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाओं से पाकिस्तानी फिल्में, गाने, वेब सीरीज और पॉडकास्ट हटा दिए जाएं। लेकिन हाल ही में हुई जांच में खुलासा हुआ कि यह पाबंदी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई। जांच के अनुसार, डिजिटल जैसे यूट्यूब चैनल्स भले ही भारत में ब्लॉक हैं, लेकिन उनकी आधिकारिक वेबसाइट्स पर ड्रामा और शोज सब्सक्रिप्शन के जरिए स्ट्रीम हो रहे हैं। इसी तरह ‘जियो न्यूज’ ब्लॉक होने के बावजूद उसकी वेबसाइट पर पाकिस्तानी सीरियल्स आसानी से उपलब्ध हैं। लगभग 15 यूट्यूब चैनल्स सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी ड्रामों को भारत में दिखा रहे हैं और मोटी कमाई भी कर रहे हैं। इंस्टाग्राम पर भी बड़े स्टार्स भले ही ब्लॉक हों, लेकिन वैकल्पिक रास्तों से वे भारतीय व्यूअर्स तक पहुंच बनाए हुए हैं। इस मामले की गंभीरता सिर्फ एंटरटेनमेंट तक सीमित नहीं है। जांच में पाया गया कि रेडियो पाकिस्तान यूट्यूब चैनल पर भारत विरोधी बयानबाजी करने वाली मुषाल हुसैन मलिक का इंटरव्यू मौजूद है। इसके अलावा पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ब्लॉग्स डिजिटल लूपहोल्स के जरिए भारत में नफरत और प्रोपगैंडा फैलाने का काम कर रहे हैं। शोज जैसे मेरी जिंदगी है तू और मेरे हमसफर ने 1.8 करोड़ व्यूअरशिप हासिल की है। डिजिटल जानकारों के अनुसार इन शोज में अक्सर छिपा भारत विरोधी नैरेटिव होता है, जो दर्शकों के मनोविज्ञान को प्रभावित कर सकता है। आईटी नियम 2021 के तहत केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की थी, लेकिन तकनीकी खामियों और प्लेटफॉर्म्स की ढीली मॉनिटरिंग के कारण यह कंटेंट आज भी आसानी से उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ बैन का ऐलान पर्याप्त नहीं है। सरकार को कंटेंट-आधारित ब्लॉकिंग और साइबर सुरक्षा को मजबूत करना होगा। गूगल, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स को बाध्य करना होगा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे वाले कंटेंट को तुरंत फिल्टर करें। पहलगाम जैसे हमलों के बाद भी पाक डिजिटल फुटप्रिंट का भारत में रहना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आशीष दुबे / 24 जनवरी 2026