क्षेत्रीय
24-Jan-2026


राजनीति: छिंदवाड़ा में आदिवासी कार्ड खेलने की तैयारी में भाजपा संगठन छिंदवाड़ा (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में निगम-मंडल अध्यक्षों की नियुक्ति पर सबकी निगाहें लगी हुई है। बताया जाता है कि नाम तय हो चुके हैं। जनवरी के पहले पखवाड़े में संक्रांति के आसपास नामों की घोषणा होने की खबरें पहले मिलीं थी अब 26 जनवरी के बाद ही फैसला होने की संभावना लग रही है। इधर छिंदवाड़ा से किसे प्रतिनिधित्व दिया जाए इस मामले में अभी भी असमंजस की स्थिति बनने के समाचार मिल रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अब छिंदवाड़ा से आदिवासी वर्ग के किसी नेता को यह जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार आदिवासी समाज से जुड़े दो आदिवासी नेताओं के नाम पर चर्चा चल रही है। इसमें चौरई के वीरपाल इवनाती और पांढुर्णा के मोरेश्वर मर्सकोले का नाम है। वीरपाल इवनाती चौरई के जनपद सदस्य है इसके अलावा भाजपा जनजातीय प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष है। दूसरा नाम पूर्व जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मोरेश्वर मर्सकोले है। ये तेजतर्रार आदिवासी नेता पांढुर्णा जिले के हैं। राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संगठन ने विचार विमर्श के बाद यह निर्णय लिया है। बताया जाता है कि जल्द ही नामों की घोषणा हो सकती है। फिलहाल, निगम- मंडल अध्यक्षों की सूची को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व छिंदवाड़ा से किस चेहरे पर अंतिम भरोसा जताता है। आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस निगम मंडलों के जरिए ही भाजपा जिले में इस बहाने आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस कर सकती है। ध्यान रहे छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र में अमरवाड़ा, पांढुर्णा, जामई आदिवासी वर्ग के लिए रिजर्व सीटें है। ये तीनो क्षेत्र आदिवासी बहुल है। इन आदिवासी वोटरों का रुझान अभी भी भाजपा की तरफ नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में इन तीन सीटों के साथ पूरी सात सीटों पर भाजपा को हार मिली थी। अमरवाड़ा विधायक कमलेश शाह भाजपा में शामिल तो हो गए लेकिन उपचुनाव मे उनकी जीत गिरते पड़ते हुई। इसकेा लेकर भाजपा चिंतित हैं। लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा सीट कांग्रेस से छीनने के बाद अब अगले विधानसभा चुनाव में जीत तलाश रही है। यही वजह है कि अब दो साल में आदिवासी वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर उनके जरिए आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस करने की कोशिश भाजपा कर रही है। इसलिए फिर से सोच-विचार जिले आदिवासियों से जुड़े और खासकर उनकी जमीनों के हस्तांरण के मामले में कांग्रेस और अन्य दल भाजपा को घेर रहे हैं। कांग्रेस और गोगपा इसे लेकर लगातार हमलावर हो रही है। इसका असर आगामी चुनावों में दिखाई दे सकता है। गौरतलब है पांढुर्णा छिंदवाड़ा से कट कर दूसरा जिला बन गया है। भविष्य में नए सीमांकन के तहत लोकसभा क्षेत्र तय हुए और पांढुर्णा अलग लोकसभा सीट बना तो यहंा पर आदिवासी नेता के रूप में भाजपा अपना प्रतिनिधित्व तैयार करना चाह रही है। पांढुर्णा में भी आदिवासी वोटबैंक कांग्रेस के ही करीब देखा जा रहा है। ऐसे में भाजपा का यह दांव भविष्य के लिए सकारात्मक साबित हेा सकता है। ईए मएस/मोहने/ 24 जनवरी 2026