25-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। तेज रफ्तार क्रिकेट के इस दौर में जहां आक्रामक बल्लेबाजी और त्वरित रन सबसे बड़ी पहचान बन चुके हैं, वहीं चेतेश्वर पुजारा ने धैर्य और संयम को अपनी ताकत बनाया। जमाने के उलट चलना आसान नहीं होता, लेकिन पुजारा ने इसी कठिन रास्ते को चुना और टेस्ट क्रिकेट में भारत की सबसे मजबूत दीवार बनकर उभरे। क्रीज पर लंबा समय बिताने की क्षमता, मानसिक मजबूती और टीम के लिए संघर्ष करने की आदत ने उन्हें राहुल द्रविड़ के बाद दूसरा ‘द वॉल’ बना दिया। 25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में जन्मे चेतेश्वर पुजारा के क्रिकेटर बनने के पीछे उनके पिता अरविंद पुजारा का बड़ा योगदान रहा। अरविंद खुद प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और कोच रहे थे। देश के लिए खेलने का उनका सपना अधूरा रह गया, लेकिन बेटे के जरिए उन्होंने उस सपने को साकार होते देखा। बचपन से ही क्रिकेट को जीवन का लक्ष्य बनाने वाले पुजारा ने सौराष्ट्र की ओर से घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान बनाई और 2005 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। लगातार पांच साल तक घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद 2010 में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू का मौका मिला। यह वह समय था जब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे दिग्गज अपने करियर के अंतिम दौर में थे और भारतीय टीम को भरोसेमंद विकल्प की तलाश थी। पुजारा ने इस मौके को दोनों हाथों से थामा और धीरे-धीरे टेस्ट टीम के स्थायी और भरोसेमंद स्तंभ बन गए। 2010 से 2023 के बीच भारत को टेस्ट क्रिकेट में मिली कई बड़ी सफलताओं में पुजारा की भूमिका अहम रही। खासतौर पर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2018-19 की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज में उनका प्रदर्शन अविस्मरणीय रहा। चार टेस्ट मैचों में 521 रन बनाकर उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को थकाया और भारत की पहली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत की नींव रखी। अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ 206 रन, जोहानसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 153 रन, रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 202 रन की मैराथन पारी और ऑस्ट्रेलिया दौरे की कई जुझारू पारियां उनके करियर की पहचान बनीं। पुजारा ने अपने टेस्ट करियर में 103 मैचों की 176 पारियों में 7,195 रन बनाए, जिसमें 19 शतक और 35 अर्धशतक शामिल रहे। उनका औसत 43.60 रहा और सर्वोच्च स्कोर नाबाद 206 रन रहा। काउंटी क्रिकेट में भी उन्होंने अपनी तकनीक और धैर्य का लोहा मनवाया। 24 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहने वाले पुजारा को टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण और संघर्ष के लिए हमेशा याद किया जाएगा। डेविड/ईएमएस 25 जनवरी 2026