राष्ट्रीय
25-Jan-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है। देश के हाईकोर्ट का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है। वह सक्रिय अदालत के रूप में कैसे काम करते हैं। हाईकोर्ट और उसकी अधीनस्थ अदालतें आम नागरिकों के हितों की रक्षा कर पाती हैं, या नहीं। उन्होंने कहा कि न्याय यदि देर से मिलता है। तो वह न्याय के नाम पर विनाश है। एक तरीके से इसे न्याय के नाम पर अन्याय माना जाएगा। शनिवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, अदालतों को मूक नहीं रहना चाहिए। हाईकोर्ट को अपनी शक्तियों को मजबूत करने और कार्य प्रणाली में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास करने होंगे। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालयों को डिजिटल गेटवे का ज्यादा से ज्यादा और बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने महाराष्ट्र के गढचिचोली की आदिवासी महिला मजदूर को यदि घर बैठे त्वरित न्याय मिलता है। तभी न्याय की सार्थकता है। एसजे / 25 जनवरी 26