- डाटा संरक्षण एवं डेटा गवर्नेंस परिसंवाद उज्जैन (ईएमएस)। डाटा प्रवाह के विभिन्न अवयव मिलकर एक स्पष्ट, नागरिक-केंद्रित व्यवस्था स्थापित करते हैं जो नवाचार और जिम्मेदार उपयोग को सक्षम बनाते हुए व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा करती है। आरबीएस शैक्षणिक समूह नीमच के नवाचार सामुदायिक जागरुकता के कैंपस आउटरीच परिसंवाद प्रसंग आयोजन में अपने आशीर्वचन शुभकामना संदेश में प्रो डा अर्पण भारद्वाज कुलगुरु सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन ने प्रो डा धर्मेंद्र मेहता द्वारा संयोजित सात सूत्रीय डाटा संरक्षण शपथ ग्रहण आयोजन के अभिनव नवाचार प्रयास पर हर्ष व्यक्त किया । प्रो डा धर्मेंद्र मेहता निदेशक संकाय अध्यक्ष प्रबंध अध्ययन ने उद्बोधन में बताया कि डाटा संरक्षण नियम यूरोप परिषद की मंत्रिपरिषद की समिति द्वारा वर्ष 2006 में ही व्यक्तिगत गोपनीयता का सम्मान करने और उसकी रक्षा करने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने और विश्व स्तर पर सीमा पार डेटा प्रवाह में *कन्वेंशन 108* की भूमिका को उजागर करने के लिए प्रत्येक वर्ष 28 जनवरी को डेटा संरक्षण दिवस के सात सिद्धांतों के साथ वैधता, निष्पक्षता और पारदर्शिता; उद्देश्य सीमा; डेटा न्यूनीकरण; सटीकता; भंडारण सीमाएं; अखंडता और गोपनीयता; और जवाबदेही को रोपित किया गया। नई पीढ़ी के सभी यूजर्स को जागरूकता संवर्धन प्रयास परिसंवाद प्रसंग सत्र में सम्मिलित हुए प्रबंध विशेषज्ञ प्रो डा धर्मेंद्र मेहता निदेशक संकायअध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू व्यवसाय प्रबंध संस्थान सम्राट विक्रमादित्य विवि उज्जैन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि स्ट्रॉन्ग पासवर्ड के साथ-साथ अपने अकाउंट को सुरक्षित रखने के लिए एक्स्ट्रा डेटा प्रोटेक्शन ऑन रखना चाहिए। टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इनेबल कर ताकि पासवर्ड कम्प्रोमाइज होने के बाद भी अकाउंट का एक्सेस न मिल सके। यूजर्स ऑथेंटिकेटर की का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, ताकि बिना परमिशन के अकाउंट एक्सेसिबल न हो सके। खास तौर पर बैंकिंग और सोशल मीडिया ऐप को इससे सुरक्षित किया जा सकता है। इस अभिनव नवाचार प्रसंग में आरबीएस संस्थान समूह नीमच के फैकल्टी मेंबर्स सर्वश्री के एल अमरूदे, डा. जितेंद्र बैरागी, कमलेश जैन यासीमा कारजोर, अनीता नागदा ने सक्रिय सहभागिता करते हुए उपस्थित प्रबंध की युवा पीढ़ी को अवगत कराया कि 11 अगस्त 2023 को लागू हुआ डीपीडीपी अधिनियम, 2023 , डिजिटल माध्यमों से एकत्रित व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण को नियंत्रित करता है, जिसमें ऑफलाइन स्रोतों से डिजिटाइज़ किया गया डेटा भी शामिल है। यह अधिनियम व्यक्तिगत गोपनीयता की रक्षा और नवाचार, सेवा वितरण और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए डेटा के वैध उपयोग को सक्षम बनाने के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन स्थापित करने का प्रयास करता है। यह सभी हितधारकों के लिए स्पष्टता, समझने में आसानी और व्यावहारिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सरल, सुलभ, तर्कसंगत और कार्रवाई योग्य *सरल दृष्टिकोण* का अनुसरण करता है। अंत में पुखराज माली ने आभार व्यक्त करते कहा कि 13 नवंबर 2025 को अधिसूचित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 , डीपीडीपी अधिनियम, 2023 को क्रियान्वित करते हुए भारत के डेटा संरक्षण ढांचे को मजबूत बनाते है। ईएमएस / 29 जनवरी 26