ज़रा हटके
30-Jan-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। वैज्ञानिकों ने दूर अंतरिक्ष में मौजूद बूढ़े और मरते सितारों का अध्ययन कर हमारे सौर मंडल के भविष्य की एक साफ तस्वीर सामने रखी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, ब्रह्मांड में कुछ भी स्थायी नहीं है और इसमें हमारा सूरज भी शामिल है। जो सूरज आज हमें रोशनी और जीवन दे रहा है, वह भी एक दिन अपना अंत देखेगा। हाल ही में 20 जनवरी 2026 को जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने हेलिक्स नेबुला की जो नई तस्वीरें भेजी हैं, उन्होंने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। यह नेबुला पृथ्वी से करीब 650 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है और इसे इसकी आंख जैसी आकृति के कारण ‘सौरन की आंख’ या ‘भगवान की आंख’ कहा जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह नेबुला हमें दिखाता है कि अरबों साल बाद हमारे सूरज की मौत के समय सौर मंडल कैसा नजर आएगा। सितारों का जीवन उनके भीतर मौजूद ईंधन पर निर्भर करता है। हमारा सूरज करोड़ों वर्षों से अपने केंद्र में हाइड्रोजन को जलाकर ऊर्जा पैदा कर रहा है। लेकिन एक समय ऐसा आएगा जब इसका हाइड्रोजन ईंधन खत्म हो जाएगा। तब सूरज अपनी मौजूदा स्थिर अवस्था को छोड़ देगा और उसका आकार तेजी से बढ़ने लगेगा। वह एक विशाल लाल दानव यानी रेड जायंट बन जाएगा। इस दौरान सूरज इतना फैल सकता है कि वह अपने नजदीकी ग्रहों को निगल ले। वैज्ञानिकों के अनुसार बुध और शुक्र का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जबकि पृथ्वी की सतह भी भीषण गर्मी से जलकर राख में बदल जाएगी। इसके बाद सूरज अपनी बाहरी परतों को संभाल नहीं पाएगा और वे परतें अंतरिक्ष में फैलने लगेंगी। जब किसी तारे की बाहरी परतें अंतरिक्ष में फैलती हैं, तो वह अपने पीछे गैस और धूल का एक सुंदर लेकिन रहस्यमयी घेरा छोड़ देता है, जिसे प्लैनेटरी नेबुला कहा जाता है। हेलिक्स नेबुला इसका सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है। यह कुंभ तारामंडल में स्थित है और लंबे समय से खगोलविदों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। पहले हबल टेलीस्कोप ने इसकी शानदार तस्वीरें ली थीं, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप की नई तस्वीरों ने इसके भीतर की संरचना को कहीं ज्यादा गहराई से दिखाया है। इन तस्वीरों में गैसों की परतें ऐसे दिखाई देती हैं, जैसे किसी मरते हुए तारे की अंतिम सांसें अभी भी चमक रही हों। वैज्ञानिकों ने हेलिक्स नेबुला में हजारों रहस्यमयी गांठों की पहचान की है, जिन्हें ‘कॉमेटरी नॉट्स’ कहा जाता है। ये गैस और धूल के सघन गोले हैं, जो मरते हुए तारे से निकलने वाली तेज हवाओं का सामना कर रहे हैं। हेलिक्स नेबुला में करीब 40 हजार ऐसी गांठें मौजूद हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से हर एक गांठ आकार में हमारे पूरे सौर मंडल से भी बड़ी है, हालांकि उनका द्रव्यमान उतना नहीं है। ये गांठें आगे की ओर चमकती हैं और पीछे गैसों की लंबी पूंछ छोड़ती हैं, जिससे वे अंतरिक्ष में उड़ते धूमकेतुओं जैसी दिखती हैं। हेलिक्स नेबुला जैसे प्लैनेटरी नेबुला ज्यादा लंबे समय तक नहीं टिकते। इनकी उम्र सिर्फ 10 से 20 हजार साल होती है, जो ब्रह्मांडीय समय के हिसाब से एक क्षण भर है। आने वाले हजारों वर्षों में यह नेबुला बिखर जाएगा और इसकी गैसें अंतरिक्ष में फैल जाएंगी। लेकिन यह अंत नहीं होगा। यही गैस और धूल भविष्य में नए सितारों और ग्रहों के निर्माण का आधार बनेगी। सुदामा/ईएमएस 30 जनवरी 2026