ज़रा हटके
30-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। प्राक्रतिक जडी-बूटी रसौत का सबसे अधिक उपयोग बवासीर, खासकर खूनी बवासीर में किया जाता है। यह समस्या व्यक्ति के दैनिक जीवन को काफी प्रभावित कर सकती है। आयुर्वेद के अनुसार रसौत पेट को साफ रखने, सूजन कम करने और रक्तस्राव को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है। इसे अनार की छाल और गुड़ के साथ मिलाकर गोली के रूप में या फिर नीम और हरड़ के साथ चूर्ण बनाकर इस्तेमाल किया जाता है। नियमित और सीमित मात्रा में सेवन करने से बवासीर के लक्षणों में काफी राहत मिल सकती है। लिवर से जुड़ी समस्याओं में भी रसौत को उपयोगी माना गया है। पीलिया के दौरान आंखों का पीला पड़ना, कमजोरी और पाचन संबंधी दिक्कतें आम होती हैं। ऐसे में रसौत का काढ़ा या शहद के साथ इसका सेवन लिवर को मजबूत करता है और पीलिया के लक्षणों को धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है। यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक मानी जाती है। मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी रसौत फायदेमंद बताई जाती है। इसमें मौजूद बर्बेरिन रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। हालांकि, जो लोग पहले से ही डायबिटीज की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, ताकि शुगर लेवल बहुत ज्यादा न गिरे। रसौत का उपयोग सिर्फ आंतरिक रूप से ही नहीं, बल्कि बाहरी तौर पर भी किया जाता है। आंखों में गुलाब जल के साथ रसौत की कुछ बूंदें डालने से खुजली, जलन और लालिमा में राहत मिलती है। त्वचा पर इसका लेप लगाने से घाव जल्दी भरते हैं और दाग-धब्बे हल्के होते हैं। मुंह और गले के संक्रमण में रसौत के काढ़े से कुल्ला करना भी लाभकारी माना गया है। हालांकि, रसौत का सेवन करते समय इसकी मात्रा और समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। अधिक मात्रा में लेने से पेट दर्द या पाचन संबंधी समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और अन्य दवाएं लेने वाले लोगों को रसौत का इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। बता दें कि आयुर्वेद में रसौत को रसंजना भी कहा जाता है और यह दारुहरिद्रा की जड़ या छाल से तैयार की जाती है। स्वाद में यह कड़वी जरूर होती है, लेकिन इसके औषधीय गुण इसे बेहद खास बनाते हैं। रसौत में मौजूद बर्बेरिन नाम का सक्रिय तत्व शरीर में सूजन कम करने, बैक्टीरिया से लड़ने और रक्त को शुद्ध रखने में अहम भूमिका निभाता है। सुदामा/ईएमएस 30 जनवरी 2026