बोले, कई बार मुख्यमंत्री को आगाह किया, फिर भी नहीं हुई सुनवाई जबलपुर (ईएमएस)। सत्ता किसी की भी हो, सत्ताधारी विधायक अपनी सत्ता के खिलाफ बोलने के पहले चार बार सोचता है, लेकिन जबलपुर के वरिष्ठ विधायक अजय विश्नोई जनहित के मुद्दों अपनी सरकार से सवाल करने की नई रीत पैदा करके, सियायत में नई रहा बना रहे हैं. अब श्री विश्नोई ने बरगी बांध की दाईं तट नहर के टूटने की घटना पर सरकार पर निशाना साधते हुये सैंकड़ों गांवों की हजारों की आबादी की आवाज मुखबर होकर उठाई है. इस मामले में सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय विश्नोई ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पाटन से भाजपा विधायक विश्नोई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। गत रविवार 1 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे बरगी बांध की मुख्य दाईं तट नहर ग्राम सगड़ा–झपनी के पास अचानक टूट गई। नहर टूटते ही तेज बहाव के साथ पानी आसपास के छह गांवों के खेतों में घुस गया। देखते ही देखते सैकड़ों एकड़ में फैली फसलें जलमग्न हो गईं और खेत तालाब में तब्दील हो गए। घटना के बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया। आंखों से दिखती है बदहाली .. अजय विश्नोई ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जबलपुर स्थित बरगी बांध की दोनों नहरें—दाईं तट और बाईं तट—अत्यधिक कमजोर हो चुकी हैं। बाईं तट नहर में क्षमता से आधे से भी कम पानी प्रवाहित किया जा रहा है, इसके बावजूद उसकी हालत बेहद खराब है। उन्होंने कहा कि नहरों की दुर्दशा किसी भी स्थान पर नंगी आंखों से देखी जा सकती है। विश्नोई ने आगे लिखा कि दाईं तट नहर के जरिए कटनी, रीवा और सतना तक पानी पहुंचाने की योजना है, जिसके लिए नहर में 227 क्यूसेक जल प्रवाहित किया जाना प्रस्तावित है, जबकि हकीकत यह है कि यह नहर 80 क्यूसेक पानी का भार भी नहीं संभाल पा रही है। रविवार को नहर टूटने की घटना ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया है। मजबूरी में सोशल मीडिया पर उठाना पड़ा मुद्दा… भाजपा विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर दिलाया, लेकिन आज तक नहरों के सुधार की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने लिखा कि मजबूरी में उन्हें सोशल मीडिया का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, सतना और रीवा जिलों के लाखों किसानों का भविष्य इस नहर प्रणाली से जुड़ा हुआ है। इस पोस्ट में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी टैग किया है। सवालों से बचते दिखे अधिकारी……….. मामला तूल पकड़ने के बाद जल संसाधन विभाग ने भोपाल से एक जांच टीम जबलपुर भेजी। सीनियर इंजीनियर पुष्पेंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारियों ने सगड़ा–झपनी गांव पहुंचकर नहर टूटने वाली जगह का निरीक्षण किया। हालांकि जांच के दौरान टीम के वरिष्ठ अधिकारी मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। न तो उन्होंने पहले से चली आ रही सीपेज की शिकायतों पर कोई स्पष्ट जवाब दिया और न ही मेंटेनेंस फंड के उपयोग को लेकर स्थिति साफ की। अधिकारियों ने केवल रिपोर्ट तैयार करने की बात कही। रिपेयरिंग का काम शुरू, कलेक्टर का बयान…… जिला कलेक्टर ने बताया कि सीपेज और नहर टूटने की घटना को लेकर भोपाल से विभागीय जांच दल ने मौके पर जांच की है। टूटी हुई नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया है और नहर का अधिकांश पानी निकल चुका है, जिससे फिलहाल वाटर लॉगिंग की कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक मरम्मत कार्य लगभग 10 दिन में पूरा कर लिया जाएगा। कलेक्टर के अनुसार, इस नहर के जरिए जिन क्षेत्रों में सिंचाई होती थी, वहां व्यवस्था पूरी तरह बहाल होने में एक से डेढ़ महीने का समय लग सकता है। इसके साथ ही अन्य पुरानी नहरों को भी दुरुस्त करने का काम किया जाएगा, जिसका विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सुनील साहू / मोनिका / 03 फरवरी 2026/ 06.35