:: प्रदेश के चार अंचलों में होंगी कृषि कैबिनेट; सरसों को भी भावांतर योजना के दायरे में लाने की तैयारी :: भोपाल/इन्दौर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के प्रति अपनी सरकार की संवेदनशीलता दोहराते हुए कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के जिन भी जिलों में ओला-पाला के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं, वहां के जिला अधिकारी तत्काल सर्वे सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित किसानों को बिना किसी विलंब के सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक से पूर्व मंत्रिपरिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में समर्पित किया गया है, जिसका मूल ध्येय किसानों की आय को दोगुना करना और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। :: अंचलों में सजेगी कृषि कैबिनेट, बदलेगा खेती का स्वरूप :: कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव के लिए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि आगामी समय में मालवा, निमाड़, चंबल और विंध्य अंचलों में कृषि कैबिनेट का आयोजन किया जाएगा। सरकार अब परंपरागत खेती के साथ-साथ उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को एकीकृत कर रही है। हाल ही में हुए राज्य स्तरीय पुष्प महोत्सव की सफलता का जिक्र करते हुए उन्होंने फूलों की अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग और नरवाई (पराली) प्रबंधन के लिए नई तकनीकों के उपयोग पर बल दिया। :: तिलहन फसलों को भावांतर का सहारा :: राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाने के लिए भावांतर योजना का विस्तार कर रही है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि सरसों सहित अन्य तिलहन फसलों को भी भावांतर योजना में शामिल करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही, दलहन उत्पादन में विविधता लाने हेतु मूंग के स्थान पर उड़द की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए नई नीति बनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन उत्पादक 1.17 लाख किसानों के खातों में हाल ही में ₹200 करोड़ की भावांतर राशि अंतरित की गई है, जो सरकार की पारदर्शिता का प्रमाण है। :: मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगे बेड, पर्यटन में होंगे नवाचार :: स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में मुख्यमंत्री ने रीवा मेडिकल कॉलेज में 750 बेड की क्षमता वृद्धि का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश के अन्य चिकित्सा महाविद्यालयों में भी बेड संख्या बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने पर्यटन और पर्यावरण के क्षेत्र में नवाचारों की आवश्यकता बताते हुए गुजरात के रण उत्सव और गिर राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर मध्यप्रदेश में ईको-सेंसिटिव पर्यटन और लायन सफारी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय बजट को विकसित भारत का रोडमैप बताते हुए मंत्रियों को निर्देश दिए कि वे इसके लाभों को जनसामान्य तक पहुँचाएं। प्रकाश/03 फरवरी 2026