* अब बिना रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन के गर्ल्स हॉस्टल या लॉज चलाने पर हो सकता है जेल पटना, (ईएमएस)। पटना समेत पूरे राज्य में शिक्षा ग्रहण कर रही छात्राओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने ‘आर-पार’ की जंग छेड़ दी है। दरअसल अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के कमजोर वर्ग प्रभाग ने 4 फरवरी को राज्य के सभी जिलों के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। अब राज्य के किसी भी कोने में बिना रजिस्ट्रेशन और पुलिस वेरिफिकेशन के गर्ल्स हॉस्टल या लॉज चलाना जेल की हवा खिला सकता है। वहीं, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के आदेश पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। हॉस्टल की मालकिन नीलम अग्रवाल का लाइसेंस रद्द करने के साथ ही उन पर भविष्य में किसी भी प्रकार का छात्रावास चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला सुरक्षा मानकों में चूक और गंभीर घटना के मद्देनजर लिया गया है। बिहार सरकार के गृह विभाग ने राज्यभर के गर्ल्स हॉस्टल और लॉज के लिए नए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब राज्य में संचालित होने वाले सभी निजी छात्रावासों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। प्रत्येक थाना क्षेत्र के हॉस्टलों का पूरा विवरण स्थानीय महिला हेल्प डेस्क को देना होगा। ताकि आपातकालीन स्थिति में पुलिस तुरंत कार्रवाई कर सके और व्यवस्था की निगरानी बनी रहे। नए नियमों के तहत अब हर गर्ल्स हॉस्टल में 24 घंटे महिला वार्डन की मौजूदगी अनिवार्य होगी। इसके अलावा, रसोइया, सफाईकर्मी और सुरक्षा गार्ड समेत सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना होगा। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हॉस्टल के मुख्य गेट और साझा क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाना और 30 दिनों का बैकअप रखना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, छात्राओं वाले कमरों के क्षेत्र में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रशासन ने आगंतुकों की निगरानी के लिए विजिटर रजिस्टर में आधार विवरण दर्ज करना और उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम को जरूरी बताया है। छात्राओं की सुरक्षा हेतु हॉस्टल परिसर में डायल 112, स्थानीय थाना और अभया ब्रिगेड के संपर्क सूत्र वाले पोस्टर लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, छात्राओं को 112 इंडिया ऐप के सुरक्षा फीचर्स के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे किसी भी संकट के समय तुरंत मदद मांग सकें। डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि किसी भी हॉस्टल में होने वाली छोटी से छोटी घटना की जानकारी तुरंत नजदीकी थाना को देना मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है. यह केवल नियम नहीं, बल्कि बच्चियों की सुरक्षा और उनके सुरक्षित भविष्य से जुड़ा मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि सूचना देने में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस को सूचना देने में काफी देर हुई। छात्रा की मौत के बाद हॉस्टल संचालिका ने पहले बच्ची के माता-पिता को जानकारी दी, लेकिन पुलिस को बिल्कुल भी सूचना नहीं दी गई। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित हॉस्टल के खिलाफ कार्रवाई का फैसला लिया गया है। हॉस्टल का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और संचालिका को भविष्य में पटना में कोई भी हॉस्टल चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संतोष झा- ०५ फरवरी/२०२६/ईएमएस