क्षेत्रीय
06-Feb-2026


व्यवस्था बिगडऩे की ये भी एक वजह, सालों से बने हैं यही हालात छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। जबलपुर संभाग की सबसे बड़ी मंडियों में शुमारऔर हर साल करोड़ों का राजस्व देने वाली छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी इन दिनों कर्मचारियेां की कमी के कारण अव्यवस्थाओं से जूझ रही है। हैरानी की बात यह है कि साल भर अनाज की आवक वाली इस मंडी का संचालन केवल दो इंस्पेक्टरों के भरोसे किया जा रहा है। मंडी परिसर में मैदानी व्यवस्था संभालनें में इन इंस्पेक्टर या निरीक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। छिंदवाड़ा मंडी में निरीक्षक के 9 पद स्वीकृत हैं लेकिन फिलहाल 2 निरीक्षक ही पूरी मंडी संभाल रहे हैं। सहायक उपनिरीक्षक के भी दो पर रिक्त हैं। मंडी में पहले पर्याप्त स्टाफ था लेकिन तबादले और रिटायरमेंट के बाद यहंा नई पदस्थापना मंडी बोर्ड से हुई ही नहीं। एक इंस्पेक्टर का चार महीने पहले तबादला हुआ लेकिन उनकी जगह किसी को यहंा पदस्थ नहीं किया गया। दो उपनिरीक्षक अगले कुछ महीनों में ओर रिटायर होने वाले हैं। कर्मचारियों की कमी के चलते नीलामी प्रक्रिया, तौल, भुगतान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रबंधन जो उपलब्ध हैं उन्हीं कर्मचारियों के जरिए किसी तरह मंडी का संचालन कर रहे हैं। मौजूद कर्मचारियों पर काम के अतिरिक्त दबाव के कारण व्यवस्थाएं चरमराती जा रहीं हैं। सालों से ए ग्रेड के सचिव की नियुक्ति नहीं जबलपुर संभाग की ए ग्रेड मंडी होने के कारण यहां ए ग्रेड का सचिव पद भी है लेकिन उस स्तर का अधिकारी यहां पदस्थ ही नहीं किया जाता। यहां दो सचिव ए और उनके सहयोग के लिए सी ग्रेड सचिव के पद दिए गए हैं। ए ग्रेड के सचिव के लिए सहायक संचालक या तहसीलदार स्तर के अधिकारी की नियुक्ति यहां होनी चाहिए। कुछ वर्षो पहले प्रतिनियुक्ति पर एक सचिव आए थे लेकिन वे भी बाद में मूल विभाग में चले गए। लंबा समय हो गया छिंदवाड़ा मंडी में एक ग्रेड के सचिव पदस्थ ही नहीं हुए हैं। ज्यादातर सचिव या तो प्रभारी के रूप में मंडी में यह पद संभाल रहे हैं या फिर सी ग्रेड के हैं। मुख्यलिपिक और सहायक लेखापाल भी नहीं कृषि उपज मंडी में बैक आफिस की बात करें तो यहंा भी कर्मचारियेां को टोटा है। एक लेखापाल है लेकिन उनके सहयोग के लिए 3 और सहायक लेखापाल के पद यहां स्वीकृत हैं तीनों खाली पडे हैं। मुख्य लिपिक के दो पदों का भी नई नियुक्ति का इंतजार हैं। सहायक ग्रेड के ही सभी नौ पदों पर फिलहाल कर्मचारी यहंा पदस्थ हैं। आफिस का कामकाज करने और सुरक्षा करने के चौकीदार और भृत्य तक का यहां टोटा है। चोरी और विवादों की आशंका परिसर में अनाज की ज्यादा आवक के समय परिसर से अनाज भरे बोरों के चोरी जाने की वारदातें भी होती आई है। मंडी के मैदानी कर्मचारी परिसर में तैनात रहें तो ये स्थितियां नहीं बन जाए। पिछले दिनों एक किसान और हम्माल के बीच मारपीट भी हुई। मंडी में नियम विरुद्ध लगे अनाजों के ढेर और छल्लियों को न लगाने के निर्देश देने के लिए भी कर्मचारी न होने पर अव्यवस्थाएं होती रहीं हैं। ईएमएस / 06/02/2026