क्षेत्रीय
07-Feb-2026
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* सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव से राजनीतिक माहौल गरमाया अंबरनाथ, (ईएमएस)। अंबरनाथ शहर के रुके हुए विकास कार्यों का समाधान खोजने के लिए आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का शिवसेना (शिंदे) नगरसेवकों द्वारा सामूहिक रूप से बहिष्कार करने के बाद अंबरनाथ के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। सीधे नगराध्यक्ष चुनी गईं बीजेपी की तेजश्री करंजुले के नेतृत्व में हुई इस बैठक से शिवसेना की गैरमौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि शहर के विकास को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दरार अब और गहरी हो गई है। कई सालों से अंबरनाथ के लोग प्रशासनिक कुशासन के कारण पानी की सप्लाई, खराब सड़कें, ड्रेनेज और ट्रैफिक जाम जैसी बुनियादी समस्याओं से परेशान हैं। इन समस्याओं को दूर करने के लिए नगराध्यक्ष ने कई पहल शुरू की हैं, और इसी के तहत शुक्रवार को नगर परिषद मुख्यालय में एक समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। बैठक में बीजेपी और कांग्रेस के नगरसेवक शामिल हुए, लेकिन शिवसेना की गैरमौजूदगी ने बैठक की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए। खबरों के मुताबिक, शिवसेना खेमा इस बात से नाराज है कि उप नगराध्यक्ष सदाशिव पाटिल और शिवसेना नगरसेवकों को भरोसे में लिए बिना या उन्हें पहले से सूचना दिए बिना कई बैठकें आयोजित की जा रही हैं। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद प्रशासन केवल कुछ खास समूहों और कार्यकर्ताओं की सुविधा के लिए चलाया जा रहा है, और जानबूझकर शिवसेना को बाहर रखा जा रहा है। यह रुख अपनाते हुए कि शहर का विकास केवल एक खास समूह के साथ काम करके हासिल नहीं किया जा सकता, शिवसेना ने बैठक का बहिष्कार करके अपना विरोध दर्ज कराया। शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी गठबंधन के समूह नेता रवि करंजुले ने इस संबंध में सीधे नगराध्यक्ष के कामकाज के तरीके पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया, लोकतंत्र में यह उम्मीद की जाती है कि नागरिकों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए सभी को साथ लेकर चला जाए, लेकिन फिलहाल शहर में प्रशासन केवल कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित है। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में राजनीतिक सत्ता संघर्ष सुलझने के बाद, शासन के इस मनमाने तरीके के लिए जवाबदेही मांगी जाएगी। दूसरी ओर, यह देखा गया कि इस राजनीतिक खींचतान के बीच शहर की समस्याएं अनसुलझी रहीं। हालांकि नगराध्यक्ष ने 29 जनवरी की मीटिंग में अधिकारियों को सख्ती से निर्देश दिया था, अब और कोई चर्चा नहीं, हमें एक्शन चाहिए, लेकिन शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में पता चला कि कचरा मैनेजमेंट सिस्टम अभी भी खराब हालत में है। बैठक में मौजूद लोगों ने अपना गुस्सा ज़ाहिर किया क्योंकि शहर के कई हिस्सों में कचरा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं आ रही थीं। अब सवाल यह है कि क्या राजनीतिक बहिष्कार का यह ड्रामा अंबरनाथ में विकास के कामों को रोक देगा ? संतोष झा- ०७ फरवरी/२०२६/ईएमएस