क्षेत्रीय
12-Feb-2026
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- बायोकेमेस्ट्री विभाग पूरी तरह ऑटोमेटिक-कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद से लगी दो अत्याधुनिक मशीनें बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) ने स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा तकनीकी उछाल लिया है। मरीजों की बढ़ती भीड़ और जांच की बढ़ती मांग को देखते हुए बायोकेमेस्ट्री विभाग में करीब 60 लाख रुपए की लागत से दो अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं। अब यहां रक्त परीक्षण की रिपोर्ट पूरी तरह कंप्यूटरीकृत, तेज और प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर उपलब्ध होगी, जिससे मरीजों को समय पर सटीक उपचार मिल सकेगा। सिम्स में प्रतिदिन औसतन 2000 ओपीडी और 800 आईपीडी मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में जांच सुविधाओं को आधुनिक बनाना समय की मांग बन गई थी। यही वजह है कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद से फुल ऑटोमैटिक बायोकेमेस्ट्री एनालाइजर और हाई परफॉरमेंस लिक्विड क्रोमेटोग्राफी एनालाइजर मशीन स्थापित की गई है। बायोकेमेस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष साहू ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 400 मरीजों के रक्त नमूनों से करीब 3500 विभिन्न जांच की जाती हैं। पहले मैन्युअल प्रक्रिया के बाद कंप्यूटर में रिपोर्ट दर्ज की जाती थी, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया ऑटोमेटेड हो गई है। इससे रिपोर्ट की शुद्धता और गति दोनों में सुधार होगा। क्यूआर कोड और बारकोड की सुविधा भी नई व्यवस्था में रिपोर्ट पर क्यूआर कोड और बारकोड की सुविधा भी रहेगी। मरीज और उनके परिजन मोबाइल फोन के माध्यम से कहीं भी और कभी भी रिपोर्ट देख सकेंगे। रिपोर्ट सुरक्षित रखने की झंझट भी खत्म होगी। सिकल सेल जांच में भी बड़ी राहत सिकल सेल जांच में भी सिम्स ने बड़ी राहत दी है। पहले अत्याधुनिक मशीन न होने से मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब प्रतिदिन 40 से अधिक सिकल सेल मरीजों की जांच यहीं हो रही है, जबकि कुल मिलाकर करीब 100 टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं। आधुनिक मशीनों से जांच की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। मरीजों को कम समय में सटीक रिपोर्ट देना ही हमारा प्राथमिक लक्ष्य है। डॉ. रमणेश मूर्ति, डीन सिम्स। मनोज राज 12 फरवरी 2026