सारंगपुर (ईएमएस)। श्वेतांबर जैन श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव भक्त परिवार के तत्वाधान में बुधवार शाम नगर में आस्था, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत एक भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। “एक शाम श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव दादा के नाम” शीर्षक से आयोजित इस भक्ति संध्या ने देर रात तक श्रद्धालुओं को भक्ति-रस में सराबोर रखा। पूरा वातावरण “जय दादा गुरु” और “नाकोड़ा भैरव की जय” के जयघोष से गुंजायमान होता रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ जैन परंपरा के अनुसार मंगलाचरण “मंगलाष्टक अरहन्त भगवन्त इन्द्र महिता, सिद्धा सिद्धिश्वरा…” के पावन उच्चारण से हुआ। मंच पर विराजित नाकोड़ा पार्श्व भैरव दादा की सुसज्जित प्रतिमा और दीपों की आलोकित छटा ने आयोजन स्थल को दिव्य आभा प्रदान की। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर, भाव-विभोर होकर दादा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। मधुर भजनों ने बांधा समां भक्ति संध्या में सुप्रसिद्ध भजन गायक एवं संगीतकार वैभव बागमार (बालोतरा) ने अपनी मधुर एवं ओजस्वी आवाज़ से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। उनकी प्रस्तुति “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, दादा गुरु आएंगे…” ने उपस्थित जनसमुदाय को भक्ति भाव से भर दिया। इसके पश्चात “नाकोड़ा वाले सुन लेना एक सवाल दीवाने का…” भजन पर पूरा पंडाल तालियों और नृत्य से गूंज उठा। भजन संध्या में आई गायिका कुमारी ज्योति बडेरा ने “मेरे पारसनाथ भगवान बदल दे तकदीरे…” की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। जैसे ही यह भजन प्रारंभ हुआ, भक्तजन हाथ उठाकर दादा के जयकारे लगाते हुए झूमने लगे। वैभव बागमार ने जहां हास्य-रस से युक्त गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, वहीं मार्मिक भजनों की प्रस्तुति ने कई श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। भक्ति, उल्लास और भावुकता का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है। दादा की भव्य आरती और सुसज्जित कुटिया कार्यक्रम के दौरान श्री नाकोड़ा पार्श्व भैरव दादा की भव्य आरती अखिलेश जैन, तृप्ति जैन एवं सौम्य जैन, आशी जैन परिवार द्वारा संपन्न की गई। विशेष रूप से कार्यक्रम स्थल पर नाकोड़ा पूर्णिमा मंडल, उदयपुर द्वारा भैरव नाथ की सुंदर कुटिया का निर्माण कर उसमें दादा की प्रतिमा को विराजित किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दीपों, पुष्पों और आकर्षक सजावट से सुसज्जित यह कुटिया श्रद्धा का केंद्र बनी रही। जैन धर्म की आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम जैन धर्म में नाकोड़ा पार्श्व भैरव दादा को तीर्थरक्षक एवं भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले देव के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना दादा अवश्य सुनते हैं। इसी आस्था के साथ कार्यक्रम में उपस्थित भक्तों ने भजनों, स्तुतियों और आराधना के माध्यम से अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। सकल जैन समाज के अध्यक्ष निर्मल जैन ने उपस्थित सभी आगंतुकों का धार्मिक दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया। आयोजन के दौरान अनुशासन, श्रद्धा और सौहार्द का वातावरण बना रहा। महिलाएं, युवा और वरिष्ठजन सभी भक्ति में लीन नजर आए। देर रात तक चली इस भक्ति संध्या में श्रद्धालु मधुर भजनों का आनंद लेते रहे और अंत में सामूहिक आरती एवं मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जैन धर्म की जीवंत आस्था, समर्पण और सामूहिक भक्ति का प्रतीक बनकर नगरवासियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। नरेन्द्र जैन / 12 फरवरी 26