नई दिल्ली,(ईएमएस)। ‘एक देश, एक चुनाव’ विधेयक पर चल रही संसदीय पड़ताल के बीच भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव न तो संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करता है और न ही इससे संघीय ढांचे या लोकतांत्रिक प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। यह विधेयक लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने के उद्देश्य से लाया गया है। जानकारी के मुताबिक, भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली जेपीसी के समक्ष जस्टिस गवई ने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए केवल एक चुनावी चक्र को समायोजित करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने विधेयक की संवैधानिक वैधता का समर्थन करते हुए कहा कि इसके लागू होने से संविधान की मूल संरचना में कोई बदलाव नहीं होगा। बैठक के बाद समिति अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रस्ताव संसद की विधायी क्षमता के दायरे में आता है और इससे व्यापक चुनाव सुधार संभव है। अन्य पूर्व सीजेआई की राय अब तक 129वें संविधान संशोधन विधेयक, 2024 पर छह पूर्व मुख्य न्यायाधीश समिति के सामने अपनी राय रख चुके हैं। इनमें रंजन गोगोई, डी. वाई. चंद्रचूड़, जे. एस. खेहर और जस्टिस गवई ने इसे संविधान के मूल ढांचे के अनुरूप बताया है। वहीं दूसरी तरफ यूयू ललित और संजिव खन्ना ने केशवानंद भारती मामला का हवाला देते हुए कुछ संवैधानिक चिंताएं जताई हैं। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर अंतिम फैसला संसद की प्रक्रिया और आवश्यक संवैधानिक संशोधनों के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन पूर्व न्यायाधीशों की राय ने बहस को नई दिशा दे दी है। हिदायत/ईएमएस 13फरवरी26