* वैज्ञानिक सोच, वैल्यू एडिशन और आधुनिक प्रबंधन से बना ‘प्रमुख डेयरी’ एक सफल मॉडल * गांधीनगर में राज्य स्तरीय द्वितीय ‘श्रेष्ठ पशुपालक’ सम्मान से नवाज़े गए खंडुभाई पटेल सूरत (ईएमएस)| सूरत जिले के महुवा तालुका के डूंगरी गांव के प्रगतिशील पशुपालक खंडुभाई गोपालभाई पटेल और उनके पुत्र पप्पू (मूल नाम हरिवदन) पटेल ने पशुपालन क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। वर्ष 1990 में खंडुभाई ने मात्र 4 गाय-भैंसों से इस व्यवसाय की शुरुआत की थी। आज यह डेयरी फार्म 120 छोटे-बड़े दुधारू पशुओं तक पहुंच चुका है। उनकी उत्कृष्ट पशुपालन पद्धति, उच्च दुग्ध उत्पादन और सफल मूल्यवर्धन मॉडल के लिए गुजरात सरकार ने गांधीनगर में आयोजित ‘श्रेष्ठ पशुपालक सम्मान समारोह 2025-26’ में खंडुभाई को राज्य में द्वितीय स्थान का ‘श्रेष्ठ पशुपालक’ पुरस्कार तथा 51 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान राज्य के पशुपालन मंत्री रमेश कटारा के हाथों प्रदान किया गया। 85 दुधारू भैंसों से रोज 600 लीटर दूध उत्पादन वर्तमान में उनके डेयरी फार्म में 85 दुधारू भैंसों सहित कुल 120 पशु हैं। इनमें हरियाणा की मुर्राह, कच्छ की बन्नी, जाफराबादी तथा राजस्थान की नेड जंगल जैसी उच्च नस्लें शामिल हैं। 85 दुधारू भैंसों से प्रतिदिन लगभग 600 लीटर तथा प्रतिमाह 18 से 20 हजार लीटर दूध उत्पादन होता है। भैंसों की बेहतर देखभाल के कारण दूध में 7.5 से 8.30 प्रतिशत तक फैट मिलता है। दूध का मूल्यवर्धन: 27 प्रकार के श्रीखंड और मठ्ठा सिर्फ कच्चा दूध बेचने के बजाय उन्होंने वैल्यू एडिशन पर जोर दिया। ‘प्रमुख डेयरी’ और ‘प्रमुख श्रीखंड’ नाम से डूंगरी और बारडोली में आउटलेट संचालित हैं। यहां घी, छाछ, श्रीखंड, मठ्ठा और मिठाइयों सहित 27 प्रकार के उत्पाद (18 प्रकार के श्रीखंड और 9 प्रकार के मठ्ठा) तैयार किए जाते हैं। प्रतिवर्ष 25 से 35 हजार किलो श्रीखंड की बिक्री होती है। उत्पादों की मांग सूरत, बारडोली, महुवा, कामरेज से लेकर अहमदाबाद और गांधीनगर तक है। इतना ही नहीं, यूके, यूएसए और कनाडा जैसे देशों में भी निर्यात कर ग्राहकों का विश्वास जीता है। अतिरिक्त दूध वे सुमुल डेयरी में जमा करते हैं, जहां उन्हें प्रति लीटर 73 से 74 रुपये का भाव तथा 15 से 17 प्रतिशत वार्षिक बोनस प्राप्त होता है। हाईटेक तबेला और वैज्ञानिक प्रबंधन उनका आधुनिक तबेला स्वच्छता और तकनीक का उदाहरण है। भैंसों के लिए पंखे, गर्मियों में वाटर स्प्रिंकलर, गोबर-मूत्र निकासी के लिए अंडरग्राउंड ड्रेनेज की व्यवस्था है। मच्छर-मक्खियों से बचाव हेतु नियमित दवा छिड़काव किया जाता है। भैंसों को संतुलित पोषण देने के लिए मक्का साइलेंज, रजका, हरा चारा, मिनरल पाउडर और विशेष पशु आहार दिया जाता है। दिन में दो बार सुबह 4 बजे और शाम 5 बजे दुहाई की जाती है। 6 कर्मचारी दुहाई कार्य में तथा 1 प्रबंधकीय कर्मचारी कुल 7 लोग फार्म संचालन में लगे हैं। जैविक खाद से अतिरिक्त आय डेयरी फार्म से प्राप्त गोबर से प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार बैग जैविक खाद तैयार की जाती है, जिसका उपयोग अपनी खेती में तथा आसपास के किसानों को बिक्री के रूप में किया जाता है। सेक्स्ड सॉर्टेड सीमन से बेहतर नस्ल पप्पू पटेल बताते हैं कि आधुनिक तकनीक अपनाना आवश्यक है। उन्होंने भैंसों में ‘सेक्स्ड सॉर्टेड सीमन’ का प्रयोग किया, जिसमें 11 में से 6 मामलों में सफलता मिली। इससे बेहतर नस्ल की मादा संतति प्राप्त होती है, जो भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक है। वे नियमित टीकाकरण, डिवॉर्मिंग और विभिन्न रोगों जैसे गले का संक्रमण, खुरपका-मुंहपका, संक्रामक गर्भपात आदि से बचाव हेतु समय पर वैक्सीनेशन कराते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य के लिए प्रतिमाह आवश्यक दवाएं और सप्लीमेंट भी दिए जाते हैं। अनुभव, अनुशासन और गुणवत्ता ही सफलता की कुंजी खंडुभाई और पप्पू पटेल का मानना है कि डेयरी फार्मिंग दिखावे से नहीं, बल्कि अनुभव, अनुशासन और गुणवत्ता से सफल होती है। उनका संदेश है कि पशुओं को संतुलित आहार दें, समय पर टीकाकरण कराएं, वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं और दूध की गुणवत्ता से कभी समझौता न करें। डूंगरी गांव के इस पिता-पुत्र की यात्रा सचमुच शून्य से शिखर तक की प्रेरक कहानी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ अन्य पशुपालकों के लिए मार्गदर्शक मॉडल बन चुकी है। सतीश/13 फरवरी