क्षेत्रीय
18-Feb-2026


*भोजपुर में लोकधारा और काव्यधारा का संगम, ‘महादेव’ महोत्सव ने बिखेरी सांस्कृतिक आभा* *भोजपुर मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय महादेव भोजपुर महोत्सव का समापन* मध्‍यप्रदेश शासन, संस्‍कृति विभाग द्वारा जिला प्रशासन, रायसेन के सहयोग से ऐतिहासिक एवं प्राचीन स्‍थल भोजपुर के मंदिर परिसर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय ‘‘महादेव’’ भोजपुर महोत्‍सव का मंगलवार को समापन हो गया। महोत्‍सव के अंतिम दिन लोक गीत एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। भोजपुर की सांस्कृतिक संध्या उस समय विशेष आभा से आलोकित हो उठी, जब एक ओर लोकगायन की स्वर लहरियों ने परम्पराओं की सोंधी महक बिखेरी, दूसरी ओर काव्य की ओजस्वी अभिव्यक्तियों ने वातावरण को 9 रसों से परिपूर्ण बना दिया। भोपाल के श्री बलराम पुरोहित ने मधुर वाणी से लोकजीवन के सौंदर्यपूर्ण परिदृश्य को जीवंत कर दिया। वहीं, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में दिल्ली के श्री अशोक चक्रधर, मुंबई के श्री दिनेश बावरा, आगरा के श्री प्रताप फौजदार, दिल्ली के श्री गजेन्द्र सोलंकी, आगरा की सुश्री रुचि चतुर्वेदी, मथुरा की सुश्री पूनम वर्मा एवं दिल्ली की सुश्री मनु वैशाली ने अपनी सशक्त एवं विविध संवेदनाओं से सजी रचनाओं के माध्यम से काव्यधारा का इस अनुपम संगम को साहित्यिक वैभव से आलोकित कर एक अविस्मरणीय उत्सव में रूपांतरित कर दिया। अंतिम दिवस की पहली प्रस्‍तुति श्री बलराम पुरोहित की हुई। उन्होंने सरस्वती वंदना के माध्यम से कंठ में विराजमान माँ शारदा को नमन कर वातावरण को भक्तिरस से अभिषिक्त कर दिया। तत्पश्चात हम जाने कछु नोने से हुईयै राजा हिमांचल के दामाद…, भोला हो कै तैयार करके सोलह श्रृंगार…, शिव कैलाश पति के…, बनवा बनवी महादेव जी…, राजा भोज के भोज नगर में बैठे भोलानाथ… तथा सिर बांधे मुकुट खेले होरी… जैसे लोकगीतों की सुमधुर प्रस्तुति से श्रोताओं को लोकसंस्कृति से अवगत कराया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में श्री अशोक चक्रधर ने अपनी विशिष्ट शैली में इस दिल की धड़कन में हम दोनों की साझेदारी है, आधी सांस हमारी इसमें आधी सांस तुम्हारी है... प्रस्तुति से प्रेम, संवेदना और आत्मीयता को व्यक्त किया। इसके पश्चात आंधी हो तूफां हो चाहे भीषण सर्दी गर्मी हो..., सबने हिम्मत हारी, तुमने कभी न हिम्मत हारी है...., जन-जन का सम्मान, तुम्हारी वर्दी पर बलिहारी है... के माध्यम से सेना के प्रति सम्मान और उसके साहस को अभिव्यक्त किया। श्री दिनेश बावरा ने पहले नदी, फिर तालाब, फिर कुआँ, फिर हैंडपंप, फिर नल की टोटी… और अब पानी की बोतल, हमने पानी को सिमटने का सफ़र देखा... रचना के माध्यम से पानी बचाने का संदेश दिया। अगली रचना इस दुनिया को खतरा ना चीन से है, ना पाकिस्तान से, ना अमेरिका से, ना इज़राइल से, इस दुनिया को सबसे ज्यादा खतरा, आपकी जेब में रखे हुए मोबाइल से है... से मोबाइल से मानव शरीर पर हो रहे प्रभाव और आपसी संबंध में पनप रहे तनाव को उजागर किया। श्री प्रताप फौजदार ने वफ़ा ईमान की बातें किताबों में ही मिलती हैं, भरोसा रोज मिलता है, भरोसा रोज डसता है… और खरगोशों के हाथ में डम्बल, पहली बार ही देखा है, और दर्प का टूटा संबल, पहली बार ही देखा है... रचना से समकालीन संवेदनाओं को स्वर दिया। अगली कड़ी में श्री गजेन्द्र सोलंकी ने नए युग की कहानी का नया उल्लास लिखना है, दिलों की धड़कनों पे प्यार का अहसास लिखना है, बदलते वक्त की आहट सुनी तो साँस यूं बोली, हमें भारत की धरती पर सुखद मधुमास लिखना है… रचना से राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया। कार्यक्रम को विस्तार देते हुए सुश्री रुचि चतुर्वेदी ने लाल महावर लगे मेरे इन पाँव की चिंता मत करना, सीमा पर जागे रहना तुम गाँव की चिंता मत करना…., पुण्य चरणों की रज हो गया, भावनाओं का ध्वज हो गया, राधिका कृष्ण इक हो गए, प्रेम का नाम ब्रज हो गया…, डूबकर जिनमें खुद को पाया है, उन्हीं आंखों को गुनगुनाया है… और शिव शिवशंभू शिव भूतनाथ शिव प्रलयंकर गल धरें नाग, नटराज वही गिरिजापति हैं, डम डम डमरू करता निनाद... जैसी भगवान शिव और श्रीकृष्ण भक्ति से ओत-प्रोत रचनाओं का पाठ किया। अगली कड़ी में सुश्री पूनम वर्मा ने किसी की याद की ख़ुशबू में भीगे केश लायी हूँ, दिलों को जोड़ने वाले अमिट उपदेश लायी हूँ…, मैं हूँ पूनम जिसे सागर भी प्यार करते हैं , जान मुझ पर निसार बार बार-बार करते हैं… जो शिकवे हैं शिकायत हैं सभी दिल से निकल जायें, हुई है भूल गर कोई चलो फिर से सँभल जायें... जैसी रचनाओं के माध्यम से प्रेम का मनमोहक वर्णन किया। सुश्री मनु वैशाली ने आखिर भाग्य नहीं माना तो वो देवों से रूठ गया, इक प्रेमी मन था प्रियतम से जो गलती से टूट गया…, सकल संसार का विस्तार से नक्शा बना कर के, हमारी कल्पनाओं से बहुत अच्छा बना कर के…, जो तुमको वरदान लगे हैं, वो मुझ पर अभिशाप रहें हैं, हमसे पूछो इक जीवन में, कितने पश्चाताप रहे हैं… के माध्यम से प्रेम और आत्मयिता का मनोहारी चित्र खिंचा। किशोर वर्मा ems रायसेन 18/02/2026