क्षेत्रीय
19-Feb-2026
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स्वयं सीएमओ के निरीक्षण में 16 में से मौके पर मिले सिर्फ 5, रसूखदार पार्षदों की शह पर चल रहा है ‘सैलरी घोटाला’! गुना (ईएमएस)। नगरपालिका परिषद गुना में सफाई व्यवस्था के नाम पर मचे अंधेरगर्दी के खेल का पर्दाफाश हो गया है। शहर की सफाई व्यवस्था क्यों चौपट है, इसका जवाब खुद मुख्य नगरपालिका अधिकारी मंजूषा खत्री के औचक निरीक्षण में मिल गया। वार्ड 16 में जब सीएमओ जांच करने पहुंचीं, तो रजिस्टर में दर्ज 16 सफाई संरक्षकों में से मौके पर सिर्फ 5 कर्मचारी मिले। बाकी 11 कर्मचारी कहां थे? क्या वे घर बैठकर वेतन डकार रहे हैं या फिर किसी माननीय की चाकरी में लगे हैं? पार्टी लाइन से भटकने वाले पार्षदों की ‘सेटिंग’ का शिकार हुआ शहर नगरपालिका सूत्रों और सियासी गलियारों में चर्चा है कि सफाई संरक्षकों की इस बंदरबांट में उन पार्षदों का हाथ है, जो नपा की बैठकों में अपनी ही पार्टी (भाजपा) की गाइडलाइन के खिलाफ जाकर केवल विरोध की राजनीति करते हैं। आरोप है कि विकास के मुद्दों पर शोर मचाने वाले इन विरोधी पार्षदों ने अपने वार्डों में सांठगांठ कर सफाई संरक्षकों की फौज खड़ी कर रखी है, लेकिन जमीन पर सफाई जीरो है। शहर के 37 वार्डों में नियुक्त सफाई संरक्षकों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जिसमें वार्ड 14 में 18 सफाई संरक्षक, वार्ड 16 में 16, वार्ड 23 में 16, वार्ड 34 में 13 सफाई संरक्षक हैं। विडंबना देखिए, जिन वार्डों में 13 से 18 कर्मचारी तैनात हैं, वहां गंदगी का अंबार है। वहीं, शहर के पिछड़े वार्ड जैसे 8, 37 और 10 में मात्र 3 से 5 कर्मचारी होने के बावजूद सफाई व्यवस्था इन वीआईपी वार्डों से कहीं बेहतर है। 30 हजार की नौकरी और 3 हजार का ‘किराएदार’ नपा सूत्रों ने एक और बड़े हवाली खेल का खुलासा किया है। बताया जा रहा है कि कई स्थाई सफाई कर्मचारी, जिनकी तनख्वाह 30 से 40 हजार रुपये है, वे खुद काम पर नहीं आते। उन्होंने अपनी जगह 3-4 हजार रुपये में भाड़े के लडक़े रख रखे हैं। हद तो तब हो गई जब जानकारी सामने आई कि 8-10 कर्मचारी तो गुना शहर में रहते ही नहीं, फिर भी उनकी हाजिरी लग रही है और सरकारी खजाने से वेतन निकाला जा रहा है। नपाध्यक्ष की सख्त चेतावनी, ‘दादागिरी या दबाव से नहीं चलेगी नगर पालिका’ इस पूरे फर्जीवाड़े पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सविता अरविन्द गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीएमओ को पत्र लिखकर सिस्टम की चूलें हिला दी हैं। अध्यक्ष ने अपने पत्र में तीखे सवाल दागते हुए पूछा है कि तीन महीने पहले 11 नवंबर 25 जारी आदेश के बावजूद स्थिति जस की तस क्यों है? नपाध्यक्ष ने पत्र में दो टूक कहा क्या नगर पालिका गुना का संचालन किसी की दादागिरी और दबाव में चलेगा? सीएमओ के आदेश की धज्जियां उड़ाने वाले इन कर्मचारियों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? श्रीमती गुप्ता ने उन मेट और दरोगाओं को भी आड़े हाथों लिया है, जो कर्मचारी की अनुपस्थिति के बावजूद वेतन की फाइल आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि कुछ विरोधी पार्षदों के दबाव में आकर जनता के टैक्स के पैसे की यह लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जनता पूछ रही सवाल, हमारा टैक्स, रसूखदारों की ऐश? नपाध्यक्ष की इस सक्रियता से भ्रष्ट मेटों और कागजी कर्मचारियों में हडक़ंप मच गया है। अध्यक्ष ने सीएमओ से 7 दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट मांगी है कि अनुपस्थित रहने वालों पर क्या एक्शन लिया गया। शहर की जनता भी अब उन पार्षदों से सवाल पूछ रही है जो सदन में तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन अपने वार्ड में सफाई संरक्षकों की फौज छिपाकर भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सीएमओ मंजूषा खत्री नपाध्यक्ष के इस हंटर के बाद उन रसूखदार गायब कर्मचारियों और उनके आकाओं पर क्या कार्रवाई करती हैं।- सीताराम नाटानी