राज्य
19-Feb-2026
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जबलपुर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की युगलपीठ—मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ—ने डायल 112 के ठेका विवाद से जुड़े मामले में डीजी व एसएसपी पुलिस टेलीकम्युनिकेशन से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इसके लिए 21 फरवरी तक का समय देते हुए जवाब की अग्रिम प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि अगली सुनवाई से पहले यदि आवश्यक हो तो प्रतिउत्तर प्रस्तुत किया जा सके। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान पूर्व आदेश के पालन में डायल 112 की पुलिस अधीक्षक नीतू ठाकुर न्यायालय में उपस्थित रहीं। याचिकाकर्ता ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने दलील दी कि कंपनी अनुबंध की धारा 46.1 के तहत विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान चाहती है। वहीं डीजी व एसएसपी पुलिस टेलीकम्युनिकेशन की ओर से पेश अधिवक्ता ने सेवाओं की प्रकृति का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस विवाद का आपसी सहमति से समाधान संभव नहीं है। 972 करोड़ का प्रोजेक्ट, कोर्ट की तीखी टिप्पणी पिछली सुनवाई में सामने आया था कि डायल 112 फेज-टू प्रोजेक्ट के तहत 1200 वाहनों पर कुल 972 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस पर हाई कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा था—“क्या डायल 112 में मर्सिडीज कार चलाई जा रही है?” कोर्ट ने 6 करोड़ 29 लाख रुपये के सीएडी (कंप्यूटर आधारित डिस्पैच) सॉफ्टवेयर के लिए जारी नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब और पुलिस विभाग से मौजूदा सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि 972 करोड़ रुपये की कुल राशि में वाहन, उपकरण, डाटा सेंटर, तकनीकी ढांचा और अन्य परिचालन व्यवस्थाएं शामिल हैं। मौजूदा सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां सामने आने के कारण नया टेंडर आवश्यक था, इसलिए याचिकाकर्ता कंपनी का विरोध निराधार है। इस पर याचिकाकर्ता कंपनी ने तर्क दिया कि पुलिस टेलीकम्युनिकेशन मुख्यालय द्वारा 31 दिसंबर 2025 को ऑटोमैटिक कंप्यूटर एडेड डिस्पैच सिस्टम के लिए नया टेंडर जारी किया गया, जबकि यही कार्य पहले से ही अनुबंध के तहत कंपनी को सौंपा जा चुका है। कंपनी के अनुसार, 12 मार्च 2025 को जारी मूल टेंडर के तहत वह मप्र डायल 112 द्वितीय चरण का सफलतापूर्वक इम्प्लीमेंटेशन, मेंटेनेंस और संचालन कर रही है। ऐसे में उसी कार्य के लिए दोबारा टेंडर निकालना न केवल अनुचित है, बल्कि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन भी है।